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कोटा मेडिकल कॉलेज का नाम भगवान परशुराम करने की उठी मांग

ब्राह्मण कल्याण परिषद कोटा ने मुख्यमंत्री के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने और विभिन्न सामाजिक मांगें रखीं।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg ज्ञापन सौंपने जाते कार्यकर्ता

ज्ञापन सौंपने जाते कार्यकर्ता

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। कोटा शहर में ब्राह्मण कल्याण परिषद की ओर से ब्राह्मण समाज से जुड़ी जनहित, सामाजिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम संभागीय आयुक्त कोटा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। परिषद के संयोजक अनिल तिवारी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र एवं सकारात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की गई है। इस दौरान समाज के सभी प्रमुख प्रतिनिधि और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर इन सभी मांगों को प्रमुखता से प्रशासन के समक्ष रखा।

मेडिकल कॉलेज

ज्ञापन के सबसे मुख्य बिंदुओं में कोटा मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर भगवान परशुराम मेडिकल कॉलेज किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही केडीए की चाणक्यपुरी आवासीय योजना के समीप स्थित चौराहे या सर्किल का नाम चाणक्य सर्किल रखे जाने तथा वहां महान आचार्य चाणक्य की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी गई। परिषद ने कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा को राज्य मंत्रिमंडल में स्थान दिए जाने की मांग का भी समर्थन किया, जो पिछले कई वर्षों से लगातार जनता के बीच रहकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

धार्मिक भूमि

परिषद की ओर से यह भी मांग की गई कि कोटा में ब्राह्मण यूथ हॉस्टल के लिए पूर्व में जो भूमि आवंटित की गई थी, उसके निरस्तीकरण आदेश को बहाल किया जाए और वह भूमि पुनः आवंटित की जाए। इसके अलावा, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने तथा उसकी वैधता को बढ़ाकर न्यूनतम तीन वर्ष किए जाने की मांग भी रखी गई। ज्ञापन में मंदिर माफी की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में नियमानुसार पुजारी का नाम दर्ज करने तथा पात्र पुजारियों को किसान डायरी उपलब्ध कराने की उचित व्यवस्था करने की मांग भी शामिल रही।

बोर्ड गठन

सरकारी भर्तियों में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को अन्य श्रेणियों की तरह आयु सीमा में उचित छूट दिए जाने की मांग भी ज्ञापन में विशेष रूप से उठाई गई। परिषद का यह तर्क रहा कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए राजस्थान में निर्धारित भर्ती आयु सीमा को लेकर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। इसके साथ ही, विप्र कल्याण बोर्ड में रिक्त नियुक्तियां करने, सवर्ण कल्याण बोर्ड का गठन करने तथा अंतरजातीय विवाह और एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों में मिलने वाली सरकारी सहायता की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग भी पुरजोर तरीके से रखी गई।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट घटनाओं और प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief