सैनिकों के हटने से इराक में गहरा सकता है बड़ा सुरक्षा संकट
इराक से अमेरिकी सेना के हटने के बाद सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
अमेरिकी सेना की वापसी की तैयारी
बगदाद, इराक। अमेरिका ने इराक से अपने सभी सैनिकों की पूर्ण वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे दो दशकों से अधिक लंबा सैन्य अभियान समाप्त हो गया है। इस ऐतिहासिक सैन्य निकासी को ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों की अनुपस्थिति से ईरानी प्रभाव वाले मिलिशिया संगठनों और इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी समूहों को फिर से संगठित होने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इराकी अधिकारियों ने देश की आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने का भरोसा जताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अचानक खालीपन से सुरक्षा संकट को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। [1]
सुरक्षा शून्य और चिंताएं
अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की मौजूदगी के बिना इराकी सुरक्षा बलों के सामने अपनी सीमाओं और आंतरिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखना एक बड़ी परीक्षा बन गया है। अमेरिकी सेना आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान खुफिया जानकारी और हवाई निगरानी के जरिए स्थानीय बलों को लगातार सहायता प्रदान करती थी। इस महत्वपूर्ण सहायता के बंद होने से सामरिक स्तर पर एक बड़ा खालीपन आ गया है, जिसे भरने के लिए स्थानीय प्रशासन संघर्ष कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि यह स्थिति विभिन्न सशस्त्र गुटों को सरकारी नीतियों और प्रमुख संस्थानों में अपना प्रभाव और अधिक मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिक्रिया
तेहरान ने अमेरिकी सेना के इस निष्कासन का खुलकर स्वागत किया है और इसे अपने प्रभाव वाले 'अक्स ऑफ रेजिस्टेंस' की एक बड़ी सफलता बताया है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों और पश्चिमी राजधानियों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि इससे पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। ईरान समर्थित गुटों के हौसले बुलंद होने से पड़ोसी देशों की सुरक्षा भी सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि यदि इस अनिश्चितता को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र एक नए सुरक्षा संकट और संघर्ष की आग में झुलस सकता है।
इस्लामिक स्टेट का खतरा
सुरक्षा अधिकारियों का मुख्य डर यह है कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) के गुप्त स्लीपर सेल इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी गतिविधियों को तेज कर सकते हैं। यद्यपि इस आतंकवादी संगठन के तथाकथित खिलाफत का वर्षों पहले अंत कर दिया गया था, फिर भी उसके अवशेष विभिन्न दुर्गम इलाकों में सक्रिय बने हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि इन समूहों को आधुनिक तकनीक या ड्रोन जैसी सामग्रियां हासिल हो जाती हैं, तो इराक की मौजूदा वायु रक्षा प्रणाली के लिए उनसे निपटना बेहद कठिन होगा। देश की आंतरिक सुरक्षा इकाइयों को अब बिना बाहरी सहयोग के इन छिपे हुए सुरक्षा संकट के खतरों से अकेले ही निपटना होगा।
भविष्य की रणनीतियां
इराकी सरकार के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और पड़ोसी देशों के साथ बेहतर खुफिया तालमेल बिठाना है। देश के राजनेताओं और सैन्य कमांडरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बाहरी शक्ति या चरमपंथी संगठन को आंतरिक मामलों का फायदा उठाने का मौका न मिले। हालांकि आम नागरिकों के एक बड़े वर्ग में विदेशी सैनिकों की विदाई को लेकर राहत का भाव है, फिर भी आंतरिक शांति का भविष्य अब पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व की दक्षता पर निर्भर करता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बगदाद इस गंभीर सुरक्षा संक्रमण काल से किस प्रकार पार पाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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