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चुनाव पूर्व विकास की चमक दिखाने वाले सौंदर्यीकरण के पात्र बने कचरा घर

विधानसभा चुनाव से पूर्व शहर में विकास की झूठी चमक बिखेरने के लिए रखे गए सौंदर्यीकरण के पात्र आज बदहाली के कारण कचरा घर बन चुके हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
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सौंदर्यीकरण के पात्र बने कचरा घर

बीकानेर, राजस्थान। 2023 के विधानसभा चुनाव के समय मतदाताओं को रिझाने और शहर में विकास की झूठी चमक बिखेरने के लिए जिम्मेदार तंत्र ने पानी की तरह पैसा बहाकर 2021-22 में इन आकर्षक पात्रों में पौधे तो लगवा दिए थे, लेकिन जैसे ही चुनावी मौसम की रात बीती और बात आई गई हो गई। प्रशासन ने इनकी सुध लेना पूरी तरह बंद कर दिया। सौंदर्यीकरण के नाम पर लगाए गए इन पात्रों में शुरुआत में लहलहाते हरे पौधों से शहर की सड़कों का नक्शा कुछ समय के लिए जरूर बदला था, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते आज हालात यह हैं कि इन लोहे की मजबूत जालियों और प्लास्टिक की परतों वाले साजो-सामान में केवल धूल, मिट्टी, कचरा और सूखी लकड़ियां ही शेष बची हैं, जो जिम्मेदार विभागों के झूठे दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। जस्सूसर गेट के बाहर लगाए गए करीब तीस ऐसे बड़े पात्र इस बात के गवाह हैं कि कैसे सरकारी योजनाएं केवल कागजों और उद्घाटन के फीतों तक ही सीमित होकर रह जाती हैं।

देखरेख का अभाव 

स्थानीय दुकानदारों और जागरूक नागरिकों ने तीखा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले लंबे समय से इन पात्रों की ओर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने झांककर देखा तक नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप सौंदर्यीकरण के ये सबूत पानी और खाद के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। अब इन पौधों के जीवन का अंत होने के बाद आम जनता ने भी इन्हें भगवान भरोसे मानकर इनमें धड़ल्ले से कूड़ा-कचरा फेंकना शुरू कर दिया है, जिससे यह योजना पूरी तरह से उपहास का पात्र बन गई है। शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की लचर और नाकारा व्यवस्था के कारण जब लोगों को अपने घरों का कचरा ठिकाने लगाने की कोई अन्य सुरक्षित जगह नहीं मिलती, तो वे मजबूरन इन खाली और बदहाल पड़े सौंदर्यीकरण के पात्रों का इस्तेमाल कचरा पात्र के रूप में करने लगते हैं। इस प्रकार, जिस करोड़ों की लागत वाली योजना को शहर को हरा-भरा बनाने के लिए धरातल पर उतारा गया था, वह आज जनता के कचरे से पटी पड़ी है और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

जस्सूसर से चौखूंटी तक बदहाल

यह प्रशासनिक लापरवाही सिर्फ एक चौराहे या नुक्कड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि जस्सूसर गेट से लेकर व्यस्त चौखूंटी पुलिया तक के पूरे मुख्य मार्ग पर ऐसे दर्जनों पात्र अपनी नग्न अवस्था में सिस्टम की पोल खोल रहे हैं। इनमें से कई पात्र जंग खाकर पूरी तरह सड़ चुके हैं और जमीन पर बिखर चुके हैं, तो कुछ शातिर लोग रातों-रात इन्हें उठाकर भी गायब कर चुके हैं। आम जनता का यह तीखा और लाजिमी सवाल है कि जब जनता की खून-पसीने की कमाई से टैक्स के रूप में वसूले गए धन को इस तरह के दिखावटी सौंदर्यीकरण पर पानी की तरह बहाया जाता है, तो फिर उनकी नियमित देखरेख और रखरखाव के लिए कोई आगे क्यों नहीं आता? जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की इस गहरी नींद और उदासीनता से साफ जाहिर होता है कि उन्हें शहर की वास्तविक सुंदरता से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि उनका मुख्य मकसद केवल कागजों में वाहवाही लूटना मात्र रह गया है।

मुख्यमंत्री दौरा और हेरफेर

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना और हास्यास्पद पहलू तो यह है कि जब हाल ही में प्रदेश के मुखिया यानी मुख्यमंत्री का बीकानेर दौरा हुआ और उनका काफिला महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के पास से गुजरने वाला था, तब प्रशासन की नींद अचानक खुली। मुख्यमंत्री की आंखों में धूल झोंकने और शहर की कबाड़ हो चुकी असली तस्वीर को छिपाने के लिए जिम्मेदार विभागों ने रातों-रात जस्सूसर गेट के इन बदहाल पात्रों को वहां से गायब कर दिया और उन्हें उठाकर विश्वविद्यालय के बाहर तथा पुगल फांटा व गौशाला के आसपास सजाकर खड़ा कर दिया। वीआईपी मूवमेंट के नाम पर इन पात्रों को एक जगह से दूसरी जगह कैरम बोर्ड की गोटियों की तरह भगाना यह साबित करता है कि तंत्र को जनता की समस्याओं से ज्यादा सिर्फ वीआईपी दौरों की खातिर फर्जी चमक-धमक दिखाने की चिंता रहती है, जबकि बाकी समय पूरा शहर भगवान भरोसे अपनी बदहाली पर सिसकता रहता है।

जिम्मेदार विभाग से मांग

शहर के प्रबुद्ध और पीड़ित नागरिकों ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए संबंधित विभागों के निकम्मे अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पूरी योजना की सुध नहीं ली गई, तो जनता जोरदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। लोगों की मांग है कि शहर के इन प्रमुख मार्गों पर रखे गए सभी लोहे के पात्रों का तुरंत प्रभाव से जमीनी सर्वे कराया जाए, यह हिसाब लगाया जाए कि कुल कितने पात्र मौके पर हैं, कितने कबाड़ बन चुके हैं और कितने रसूखदारों द्वारा गायब कर दिए गए हैं। इसके बाद इन सभी बचे हुए पात्रों की नए सिरे से मरम्मत कराकर उनमें दोबारा हरे-भरे पौधे रोपे जाएं तथा उनके नियमित पानी और खाद की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इस फ्लॉप हो चुकी योजना को इसके मूल उद्देश्य—शहर को सचमुच स्वच्छ, हरा-भरा और सुंदर बनाने—से दोबारा जोड़ा जा सके और जनता के गाढ़े धन की सही सदुपयोगिता साबित हो सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी और तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief