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छात्रा का एक वर्ष का नुकसान, स्कूल की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा सुनेना सोनी पुत्री जगदीश प्रसाद सोनी का एक वर्ष का नुकसान, स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर में कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा सुनेना सोनी पुत्री जगदीश प्रसाद सोनी ने जिला कलेक्टर को एक लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और उसे दसवीं बोर्ड परीक्षा में पुनः आवेदन करने का उचित अवसर दिलाने की पुरजोर मांग की है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा छात्रा के भविष्य और उसका एक वर्ष का नुकसान होना है, जो स्कूल द्वारा समय पर दस्तावेज न देने के कारण सीधे तौर पर पैदा हुआ है। शिकायत के अनुसार, छात्रा ने सेंट श्री खेतश्वर एजुकेशन सोसायटी विद्यालय में दसवीं कक्षा तक नियमित पढ़ाई की थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों और मानसिक तनाव के कारण सप्लीमेंट्री आने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने फीस बकाया होने का हवाला देकर चार महीने तक टीसी और अंकतालिका रोक ली।

एक वर्ष का नुकसान  

छात्रा का मुख्य आरोप है कि शैक्षणिक दस्तावेज समय पर नहीं मिलने के कारण वह दूसरे विद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं कर सकी और दसवीं बोर्ड परीक्षा के पुनः आवेदन की सभी निर्धारित अंतिम समय-सीमाएं पूरी तरह से निकल चुकी हैं। अब किसी भी प्रकार का नया अवसर न मिलने के कारण छात्रा का एक वर्ष का नुकसान होना तय माना जा रहा है, जिससे उसका पूरा भविष्य गंभीर संकट में आ गया है। एडवोकेट अनिल सोनी ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए बताया कि समय पर दस्तावेज नहीं मिलने के कारण वह दसवीं बोर्ड परीक्षा में दोबारा शामिल होने के सुनहरे अवसर से पूरी तरह वंचित हो गई, जिससे उसका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब होने की स्थिति पैदा हो गई है।

बोर्ड से गुहार

पीड़ित छात्रा ने जिला प्रशासन के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर को विशेष परिस्थितियों के आधार पर अपना यह प्रकरण भेजने तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत दसवीं बोर्ड परीक्षा का पुनः आवेदन पत्र भरने की विशेष अनुमति दिलाने की जोरदार मांग की है। अपनी इस शिकायत में छात्रा ने यह भी मांग उठाई है कि जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बोर्ड अजमेर को इस मामले की पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी जाए। इसके साथ ही, यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेज रोकने में नियमों का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार सख्त से सख्त कानूनी तथा प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य विद्यार्थी का बहुमूल्य शैक्षणिक वर्ष इस प्रकार से बर्बाद न हो सके।

जांच की गहरी आस

इस पूरे गंभीर प्रकरण के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और अभिभावकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बेहद चिंताजनक विषय है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने भी प्रशासन से यह मांग की है कि वह इस मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच करवाए ताकि छात्रा के एक वर्ष के नुकसान की भरपाई का कोई रास्ता निकल सके। छात्रा और उसके परिजनों को पूरी उम्मीद है कि जिला प्रशासन और शिक्षा बोर्ड उनकी इस गुहार को गंभीरता से सुनेगा और उन्हें बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर प्रदान कर न्याय दिलाएगा। इस प्रकार की घटनाएं शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा सबक साबित हो सकती हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी और तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief