कोटा के जैन मंदिर में चातुर्मास के पावन अवसर पर भव्य धर्मसभा का आयोजन
चातुर्मास के पावन अवसर पर कोटा के जैन मंदिर में 'विराग वर्धन वर्षायोग-2026' के अंतर्गत आयोजित भव्य धर्मसभा और मुनिश्री के प्रवचन।
भव्य धर्मसभा का आयोजन
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में 'विराग वर्धन वर्षायोग-2026' के अंतर्गत चातुर्मास के पावन अवसर पर एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवचन श्रवण किए और अपने जीवन को धन्य बनाया। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय और अनुशासन का अनूठा माहौल देखने को मिला।
धर्म का वास्तविक सार
कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे विराग वर्धन वर्षायोग-2026 के पावन चातुर्मास अवसर पर आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन दिए। मुनिश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म ही मानव जीवन का एकमात्र वास्तविक सार है, जबकि दुनिया के अन्य सभी विषय पूरी तरह से असार हैं। केवल अटूट श्रद्धा के माध्यम से ही कोई भी जीव भगवान बनने की महान दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मात्र आधे घंटे तक ध्यानपूर्वक प्रवचन सुनने से मनुष्य के मन और योगों की प्रवृत्ति अशुभ विचारों से हटकर पूरी तरह शुभ कर्मों की ओर अग्रसर होने लगती है।
सम्यग्दर्शन और कर्तव्य
मुनिश्री ने आगे फरमाया कि आज के इस पावन समय में सुना गया धर्मोपदेश भविष्य के किसी भी भव में जातिस्मरण के माध्यम से सम्यग्दर्शन प्राप्ति का मुख्य कारण बन सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अधर्मद्रव्य सहित सभी छह द्रव्यों के सच्चे स्वरूप को भली-भांति समझकर अपने सम्यग्दर्शन को अत्यंत दृढ़ करना चाहिए। उन्होंने मातृ शक्ति की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यदि एक मां अपनी संतान और पूरे परिवार को सही धर्म के मार्ग पर चलाती है, तो वह समाज के सौ शिक्षकों से भी कहीं अधिक बढ़कर होती है। इसलिए अपने दैनिक जीवन में हमेशा धर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता देना सबसे अधिक आवश्यक है।
तीर्थ विकास और सम्मान
अपने उद्बोधन के अगले चरण में मुनिश्री ने विरागोदय तीर्थ पथरिया में आचार्यश्री के मार्गदर्शन में संपन्न हुए भव्य निर्माण कार्यों तथा श्रेयांसगिरि यानी चांला में कराए गए ऐतिहासिक जीर्णोद्धार कार्यों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। इस धार्मिक और आध्यात्मिक अवसर पर प्रतिष्ठाचार्यक डॉ. आचार्यगुरु भक्त अक्षत भैया का मंदिर कमेटी की ओर से पारंपरिक रूप से अभिनंदन किया गया। इस दौरान उन्होंने सभी को चातुर्मास कराने के वास्तविक महात्म्य पर बेहद सुंदर ढंग से प्रकाश डाला जिससे उपस्थित भक्तों में भारी उत्साह और आनंद का संचार देखने को मिला। कार्यक्रम के अंत में मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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