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मानगढ़ धाम के संरक्षण और पहचान को लेकर कल्याण आश्रम का प्रस्ताव

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग भीलवाड़ा में उठी। वनवासी कल्याण आश्रम ने इतिहास को पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की मांग रखी।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg वनवासी कल्याण आश्रम की प्रेस वार्ता

वनवासी कल्याण आश्रम की प्रेस वार्ता

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में उठी है। भीलवाड़ा के रामेश्वरम भवन में हुई बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय कार्यकारी मंडल ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास की मांग की गई है। साथ ही राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की पाठ्य पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने का आग्रह किया गया है। आश्रम ने इसे जनजातीय समाज के ऐतिहासिक बलिदान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।

मानगढ़ का इतिहास

मानगढ़ धाम का इतिहास 17 नवंबर 1913 की उस घटना से जुड़ा है, जब गोविंद गुरु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भील जनजातीय लोग मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र हुए थे। सरकारी अभिलेखों के अनुसार ब्रिटिश शासन ने इस सभा पर गोलीबारी की, जिसमें करीब 1500 जनजातीय लोगों की जान गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में मानगढ़ की घटना को ब्रिटिश शासन की क्रूरता का उदाहरण बताते हुए बलिदानियों को याद किया था। सरकारी जानकारी के अनुसार उस समय 1.5 लाख से अधिक भील मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र हुए थे। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए आश्रम ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई है।

संरक्षण की मांग

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने मानगढ़ धाम के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण तथा विकास सुनिश्चित करने की मांग की है। आश्रम के प्रस्ताव में कहा गया कि मानगढ़ धाम से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को पाठ्य पुस्तकों में उचित स्थान मिलना चाहिए। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसके इतिहास को शामिल करने का आग्रह किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2022 में मानगढ़ धाम के विकास के लिए राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को मिलकर रोडमैप तैयार करने की बात कही थी। केंद्र की आधिकारिक सामग्री में मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की योजना का उल्लेख भी मिलता है।

बैठक में जुटे पदाधिकारी

केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दौरान आश्रम के पदाधिकारियों ने जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की। पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर, प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर और बैठक के मीडिया एवं प्रचार प्रसार संयोजक कैलाश सोनी मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता से पहले आश्रम की प्रांत कार्यकारिणी बैठक हुई। केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 30 सितंबर से शुरू हुई। इसके बाद 2 और 3 अक्टूबर को भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में देशभर के प्रांत पदाधिकारियों की व्यापक बैठक आयोजित की जा रही है।

सम्मेलन में 350 से अधिक पदाधिकारी

भीलवाड़ा में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्रीजी महाराज ने सुबह 9.15 बजे दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने वनवासी समाज के कल्याण और मुख्यधारा से जोड़ने के कार्यों का उल्लेख किया। राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने आश्रम की ओर से संचालित गतिविधियों और जनजातीय समाज के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। आयोजकों के अनुसार 2 और 3 अक्टूबर की बैठक में देशभर से 350 से अधिक पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। बैठक की तैयारियों में रामप्रकाश अग्रवाल, ज्ञानचंद जैन, दुर्गालाल सोनी, नरेश ओझा, महावीर सोनी, अनीता काबरा, कैलाश नंदावत सहित कई कार्यकर्ता जुटे रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief