अहिंसा दिवस पर अणुव्रत समिति ने करुणा, संयम और विवेक का संदेश दिया
अहिंसा दिवस पर गंगाशहर के तेरापंथ भवन में अणुव्रत समिति ने करुणा, संयम और विवेक का संदेश दिया। साध्वी और वक्ताओं ने विचार रखे।
मुख्य वक्ता कवयित्री एवं साहित्यविद डॉ. मोनिका गौड़
गंगाशहर (बीकानेर), राजस्थान। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के निर्देशानुसार अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दूसरे दिन अहिंसा दिवस मनाया गया। अणुव्रत समिति गंगाशहर की ओर से तेरापंथ भवन के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम साध्वी श्री त्रिशला कुमारी के सान्निध्य में हुआ। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता कवयित्री एवं साहित्यविद डॉ. मोनिका गौड़ रहीं। महिला विंग की संतोष बोथरा, अनुपम सेठिया, शशि रांका और मुन्नी देवी चौरड़िया ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में श्रावक समाज के लोगों की अच्छी उपस्थिति रही। समिति अध्यक्ष करणीदान रांका सहित पदाधिकारी और कार्यकर्ता आयोजन में मौजूद रहे।
अहिंसा का मूल भाव
अहिंसा दिवस पर साध्वी श्री त्रिशला कुमारी ने कहा कि जो साधक अहिंसा को समझ लेता है, वह आत्मवत सर्वभूतेषु की भावना के साथ व्यवहार करता है। उन्होंने कहा कि अणुव्रत का हृदय अहिंसा है और अहिंसा का हृदय करुणा तथा दया है। साध्वी ने कहा कि किसी भी धर्म में आस्था रखने वाला व्यक्ति अणुव्रती बन सकता है। समिति मंत्री एडवोकेट कन्हैयालाल बोथरा ने बताया कि साध्वी श्री कल्पयशा ने संयम को भी अहिंसा की साधना का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के अनुसार विवेक ही धर्म है और वस्तुओं के उपयोग में विवेक से स्वयं में बदलाव लाकर स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।
अहिंसा पर विचार
मुख्य वक्ता डॉ. मोनिका गौड़ ने कहा कि अहिंसा केवल किसी पर प्रहार नहीं करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म तीनों स्तरों पर इसका पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अहिंसा जीवन कल्याण की भावना से जुड़ी चर्या है। इसके लिए व्यक्ति को सहिष्णु बनना चाहिए, लेकिन अन्याय के विरुद्ध स्वयं और समाज की रक्षा करना भी जरूरी है। उन्होंने सहिष्णुता को व्यवहार और रक्षा को कर्तव्य बताते हुए दोनों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम प्रभारी संतोष बोथरा ने बताया कि मुख्य वक्ता ने अहिंसा दिवस के अवसर पर जीवन में इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया।
सम्मान और आभार
कार्यक्रम में महिला विंग की ओर से मुख्य वक्ता डॉ. मोनिका गौड़ का पताका पहनाकर और साहित्य भेंट कर सम्मान किया गया। समिति के उपाध्यक्ष मनोज सेठिया ने आभार ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रभारी संतोष बोथरा ने किया। समिति कोषाध्यक्ष विजय बोथरा ने बताया कि आयोजन में समिति के पदाधिकारियों और महिला विंग की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अहिंसा, संयम, करुणा और विवेक को व्यक्तिगत जीवन के साथ सामाजिक व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया। आयोजन में श्रावक समाज की उपस्थिति के बीच अणुव्रत विचारों और अहिंसा के व्यावहारिक पक्ष पर चर्चा हुई।
पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति गंगाशहर के अध्यक्ष करणीदान रांका, उपाध्यक्ष मनोज सेठिया, मनीष बाफना, मंत्री कन्हैयालाल बोथरा, कोषाध्यक्ष विजय बोथरा, शिखरचंद डागा, राजेंद्र नाहटा, विमल चौरड़िया, धर्मेंद्र डाकलिया, राजेंद्र बोथरा, ताराचंद गुलगुलिया, देवेंद्र बोथरा, मनोज जैन सेठिया, नवरतन रांका, दिलीप सिरोहिया और डालचंद बुच्चा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। महिला विंग से संतोष बोथरा, शशि रांका, अनुपम सेठिया सहित पूरी महिला विंग ने सहभागिता की। समिति के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। कार्यक्रम में अहिंसा दिवस के संदेश को जनजीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
अस्वीकरण:
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