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AIIMS की नौकरी छोड़ी, डॉक्टर ने 50 हजार लोगों को दिया CPR प्रशिक्षण 

AIIMS की नौकरी छोड़कर गांव लौटे डॉक्टर ने 18 जिलों में 50000 से अधिक लोगों को CPR प्रशिक्षण दिया। जानिए उनकी पहल और आगे की योजना।

By अजय त्यागी
1 min read
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CPR प्रशिक्षण देते डॉ रंजन

गोपालगंज, बिहार। गोपालगंज के बरौली निवासी डॉ. अभिषेक रंजन ने AIIMS की नौकरी छोड़कर अपने गृह जिले में लोगों को आपात स्थिति में जीवन बचाने की तकनीक सिखाने का अभियान शुरू किया है। वह गांवों और दूरदराज के इलाकों में जाकर CPR प्रशिक्षण दे रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बिहार के 18 जिलों में अब तक 50000 से अधिक लोगों को CPR प्रशिक्षण दिया है। उनका जोर इस बात पर है कि अस्पताल या एंबुलेंस पहुंचने से पहले आसपास मौजूद लोग सही प्राथमिक सहायता दे सकें। इसी सोच के साथ उनका अभियान लगातार ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।  [1]

जीवन बचाने की मुहिम

डॉ. अभिषेक रंजन मूल रूप से बरौली प्रखंड के कोयनी गांव के रहने वाले हैं और किसान राजीव रंजन के बेटे हैं। उन्होंने पटना में 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद कटक मेडिकल कॉलेज से MBBS, PG और MD की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने AIIMS में करीब 3 साल काम किया। वर्ष 2018 में वह अपने गृह जिले गोपालगंज लौट आए। फिलहाल वह वहां निजी क्लिनिक में मरीजों का इलाज करते हैं और इसके साथ गांवों तथा दूरदराज के इलाकों में CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाते हैं। उनका उद्देश्य चिकित्सा ज्ञान को केवल क्लिनिक तक सीमित न रखना है।

डॉ. अभिषेक रंजन का मानना है कि अचानक हृदय रुकने या सांस बंद होने जैसी स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में एंबुलेंस या चिकित्सक के पहुंचने से पहले सही CPR मिलने से मरीज को तत्काल जीवनरक्षक सहायता दी जा सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने मुफ्त प्रशिक्षण शुरू किया। अब तक 18 जिलों में 50000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने की जानकारी सामने आई है। इस अभियान में ग्रामीणों और युवाओं के साथ सरकारी अधिकारी, पुलिसकर्मी, आशा कार्यकर्ता, ममता तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल किए गए हैं। प्रशिक्षण में आपात स्थिति पहचानने और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की जानकारी भी दी जाती है।

गांवों तक पहुंची ट्रेनिंग

इस पहल में पुलिसकर्मियों को मास्टर ट्रेनर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा लोगों तक CPR की जानकारी पहुंचाई जा सके। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. अभिषेक का प्रयास है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों और ग्रामीण इलाकों में जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित लोग शुरुआती मदद दे सकें। वह अलग अलग गांवों और संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही तरीके से प्रतिक्रिया देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से CPR प्रशिक्षण को स्थानीय समुदाय तक ले जाने का सिलसिला जारी है।

रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. अभिषेक ने इस अभियान को केवल अपने गृह जिले तक सीमित नहीं रखा है। बिहार के 18 जिलों में 50000 से अधिक लोगों तक CPR प्रशिक्षण पहुंचाने के बाद अब उनका लक्ष्य इसे राज्य के बाकी हिस्सों तक ले जाना है। इसके लिए पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों को आगे प्रशिक्षण देने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क तैयार होने से आपात स्थिति में शुरुआती सहायता अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकती है। इसी सोच के तहत गांवों, संस्थानों और सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों को अभियान में जोड़ा जा रहा है।

सेवा का संकल्प

डॉ. अभिषेक के अनुसार, इस अभियान का विस्तार बिहार के बाकी जिलों तक करने की योजना है। उनका लक्ष्य 2026 के अंत तक राज्य के शेष 20 जिलों में भी प्रशिक्षण पहुंचाना है। वह चाहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में CPR की जानकारी आम लोगों तक पहुंचे और पुलिस तथा अन्य स्थानीय कर्मी इसे आगे सिखाने में सक्षम हों। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का खर्च भी वह स्वयं उठा रहे हैं और महीने में करीब 2 जिलों में प्रशिक्षण के लिए जाते हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य इस प्रयास को देशभर में विस्तार देना और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा बनाना है।

AIIMS की नौकरी छोड़कर गृह जिले में लौटने के बाद डॉ. अभिषेक रंजन ने चिकित्सा सेवा के साथ सामुदायिक प्रशिक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया है। 50000 से अधिक लोगों तक CPR प्रशिक्षण पहुंचाने वाला यह अभियान अस्पताल आधारित उपचार के साथ आपात स्थिति में शुरुआती सहायता की भूमिका पर जोर देता है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने, सांस बंद होने या हृदय रुकने जैसी स्थिति में आसपास मौजूद व्यक्ति की त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी सोच के तहत वह गांवों, संस्थानों और सरकारी कर्मियों के बीच प्रशिक्षण पहुंचा रहे हैं। उनका प्रयास अब बिहार के बाकी जिलों तक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief