UCIL के 60 साल पूरे, यूरेनियम खनन से परमाणु ऊर्जा मिशन को मिला बल
UCIL के डायमंड जुबली वर्ष में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण में 60 साल की विशेषज्ञता सामने आई, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का अहम आधार है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, UCIL ने 4 अक्टूबर 2026 को अपने डायमंड जुबली वर्ष की शुरुआत के साथ भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अपनी 60 साल की भूमिका को रेखांकित किया। परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत आने वाले इस सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना 4 अक्टूबर 1967 को हुई थी। UCIL ने छह दशकों में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण में विशेषज्ञता तथा बुनियादी ढांचा विकसित किया है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ अजित कुमार मोहंती ने कहा कि यह अवसर भविष्य की जरूरतों के लिए नवाचार और क्षमता निर्माण के महत्व को दोहराने वाला है। [1]
यूरेनियम अहम
UCIL भारत की स्वदेशी यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण संस्था रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार, यह परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए जरूरी यूरेनियम संसाधन आधार उपलब्ध कराती है। कंपनी झारखंड में 6 भूमिगत खदानों और 1 खुली खदान का संचालन करती है, जबकि आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ले में भी भूमिगत खदान और प्रसंस्करण संयंत्र संचालित है। झारखंड से निकलने वाले अयस्क का प्रसंस्करण जादूगोड़ा और तुरामडीह स्थित संयंत्रों में किया जाता है। यूरेनियम की उपलब्धता भारत के स्वदेशी परमाणु ईंधन चक्र के लिए महत्वपूर्ण है।
डायमंड जुबली वर्ष के कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी कर्मियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर परमाणु ऊर्जा आयोग की सदस्य वित्त सीमा जैन ने UCIL की छह दशकों की वैज्ञानिक क्षमता, संस्थागत अनुभव और समर्पित सेवा को रेखांकित किया। उन्होंने डॉ होमी जहांगीर भाभा और उन अग्रदूतों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण क्षमता की नींव रखी। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को UCIL की खदानों, अयस्क संचालन और प्रसंस्करण प्रणालियों की प्रत्यक्ष जानकारी भी दी गई।
60 साल का सफर
UCIL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ कचम आनंद राव ने कहा कि डायमंड जुबली वर्ष कंपनी के हर सदस्य के लिए गर्व का अवसर है। उनके अनुसार, छह दशकों में UCIL ने यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण में विशेषज्ञता तथा बुनियादी ढांचा तैयार किया और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा तथा पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत किया। कंपनी की गतिविधियों में भूमिगत और खुली खदानों से लेकर अयस्क प्रसंस्करण, तकनीकी विकास, व्यावसायिक सुरक्षा, विकिरण सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन तक की क्षमताएं शामिल हैं। इन गतिविधियों के जरिए यूरेनियम संसाधन आधार को बनाए रखना परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम घरेलू यूरेनियम संसाधनों के उपयोग और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है। परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, देश का 3 चरणों वाला कार्यक्रम पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम आधारित प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों पर केंद्रित है, जिसके बाद फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और थोरियम के व्यापक उपयोग की दिशा आती है। अप्रैल 2026 में स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल करने को दूसरे चरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। ऐसे व्यापक कार्यक्रम में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता संसाधन उपलब्धता तथा ईंधन चक्र की निरंतरता के लिहाज से अहम है।
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