हनुमान अंश का असर: कैंची धाम में उमड़ी भीड़, सड़कें हुईं जाम
कैंची धाम में लंबे सप्ताहांत पर 35,000 से अधिक श्रद्धालु रोज पहुंचे। हनुमान अंश की सफलता के बाद बढ़ी भीड़ से पहाड़ी सड़कों पर घंटों जाम लगा।
कैंची धाम - फाइल फोटो : इन्टरनेट
नैनीताल, उत्तराखंड। कैंची धाम में 2 अक्टूबर से शुरू हुए लगातार 3 दिनों के अवकाश के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। कुमाऊं की पहाड़ी सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई परिवार घंटों जाम में फंसे रहे। कुछ श्रद्धालु वाहन छोड़कर पैदल मंदिर की ओर जाते दिखाई दिए। भीमताल, भवाली और कैंची के आसपास भी यातायात प्रभावित रहा। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन ने बताया कि सामान्य दिनों में करीब 25,000 लोग रोज यहां आते हैं, जबकि इस सप्ताहांत ( 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर) के दौरान रोजाना 35,000 से अधिक लोगों की भीड़ दर्ज हुई। [1]
भीड़ का दबाव
कैंची धाम में अचानक बढ़ी भीड़ के पीछे प्रशासन ने 2 प्रमुख कारण बताए हैं। पहला कारण मानसून का खत्म होना है, जिसके बाद बारिश और भूस्खलन के कारण पहाड़ों से दूरी बनाए रखने वाले पर्यटक फिर लौटने लगे। दूसरा बड़ा कारण हनुमान अंश फिल्म की सफलता है, जिसने नीम करौली बाबा की शिक्षाओं और जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाया है। प्रशासन के मुताबिक, फिल्म के बाद तीर्थस्थल में आने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी। लंबे सप्ताहांत में कैंची धाम की ओर जाने वाली सड़क पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का यातायात एक साथ बढ़ गया, जिससे कई घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।
कैंची धाम में बढ़ती लोकप्रियता का असर पहले से उपलब्ध आंकड़ों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2026 के पहले 6 महीनों में यहां 24.34 लाख लोग पहुंचे, जबकि इससे पिछले पूरे वर्ष में करीब 8 लाख लोगों ने यहां दर्शन किए थे। वर्ष 2025 में किए गए पर्यटन विभाग के कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन में पाया गया कि 64 प्रतिशत श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए आते हैं और उसी दिन लौट जाते हैं। अध्ययन में 82.4 प्रतिशत श्रद्धालु उत्तराखंड के बाहर से आने वाले मिले। करीब 2 तिहाई आगंतुक 15 से 30 वर्ष की आयु के थे, जो नई पीढ़ी में बढ़ती रुचि का संकेत देता है।
प्रशासनिक कदम
जाम की स्थिति को देखते हुए नैनीताल प्रशासन कैंची क्षेत्र से अल्मोड़ा और रानीखेत की ओर जाने वाले मौजूदा बाईपास को वैकल्पिक मार्ग के रूप में खोलने पर विचार कर रहा है। जिलाधिकारी ललित मोहन के अनुसार, यातायात दबाव कम करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जा सकती है। प्रशासन ने मंदिर प्रबंधन, पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर भीड़ नियंत्रण के उपाय तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को मुक्तेश्वर की ओर से आने वाला यातायात साफ कर दिया गया था। सोमवार तक तत्काल जाम की स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई थी और कैंची धाम के आसपास आवागमन पहले की तुलना में सुचारु दिखा।
कैंची धाम के आसपास स्थायी यातायात समाधान के लिए 18.15 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण भी चल रहा है। यह मार्ग सैनिटोरियम से रानीघाट तक प्रस्तावित है। इसमें 8 किलोमीटर हिस्से का काम पूरा कर हॉट मिक्स किया जा चुका है, जबकि 10.15 किलोमीटर हिस्से में पहाड़ काटने का काम पूरा बताया गया है। बाईपास को भवाली अल्मोड़ा राजमार्ग से जोड़ने के लिए मोटर पुल भी बनाया जा रहा है। भवाली बाईपास और शिप्रा नदी पर 30 मीटर लंबा डबल लेन पुल तैयार है। राज्य लोक निर्माण विभाग ने टल्ला रामगढ़ रतीघाट मार्ग को भी वैकल्पिक रास्ते के रूप में चिह्नित किया है।
सुविधाओं पर दबाव
कैंची धाम के लिए वर्ष 2025 के अध्ययन में पार्किंग सबसे बड़ी बुनियादी समस्या के रूप में सामने आई थी। 74 प्रतिशत श्रद्धालु पार्किंग व्यवस्था से असंतुष्ट थे। वहीं 58 प्रतिशत ने स्वच्छता को लेकर असंतोष जताया। अध्ययन के अनुसार, पीक दिनों में यहां करीब 11,000 श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि सामान्य दिनों में संख्या 2,000 से 3,000 के बीच रहती है। 59.4 प्रतिशत आगंतुक पहली बार आए थे और केवल 22 प्रतिशत ने स्थानीय होटल या होमस्टे में ठहरने की जानकारी दी। बढ़ती लोकप्रियता के साथ कैंची धाम की सड़क, पार्किंग और अन्य सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
फिल्म हनुमान अंश के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने श्रद्धालुओं से यात्रा से पहले कैंची धाम की स्थिति जांचने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मी मंदिर के अंदर और बाहर तैनात किए गए हैं। स्थानीय कारोबारियों और निवासियों का कहना है कि समस्या पर्यटकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि काम पर जाने वाले लोगों, जरूरी सामान पहुंचाने वालों और चिकित्सा जरूरत वाले लोगों को भी परेशानी हुई। तत्काल भीड़ कम होने के बावजूद स्थानीय लोगों के लिए समाधान की मांग बनी हुई है। कैंची धाम पर बढ़ता दबाव प्रशासन के सामने सड़क और यातायात व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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