WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

2.5 लाख रिश्वत मामले में DGCA अधिकारी और कंपनी निदेशक की गिरफ्तारी

DGCA अधिकारी पर 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। CBI ने चेन्नई में अधिकारी और निजी विमान प्रशिक्षण कंपनी के निदेशक को गिरफ्तार किया।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

चेन्नई, तमिलनाडु। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रिश्वत के एक मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के चेन्नई स्थित उप निदेशक एयरवर्थीनेस सुशील कुमार गर्ग और एक निजी विमान प्रशिक्षण कंपनी के निदेशक सचिन केशव भाने को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अनुसार, DGCA अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी द्वारा संचालित विमानों के एयरवर्थीनेस प्रमाणन में अनुचित लाभ देने के बदले 2.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और स्वीकार की। एजेंसी ने इस मामले में कंपनी और कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है। जांच का उद्देश्य कथित लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाना है।   [1]

पूरा घटनाक्रम

सीबीआई को कथित रिश्वत मांगने से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और कार्रवाई शुरू की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, रिश्वत की रकम विमान प्रशिक्षण संगठन से जुड़े विमानों के एयरवर्थीनेस प्रमाणन से संबंधित नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी थी। एयरवर्थीनेस प्रमाणन वह महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान निर्धारित सुरक्षा और संचालन मानकों को पूरा करते हैं। आरोप के अनुसार, DGCA अधिकारी ने निजी कंपनी के विमानों के प्रमाणन में अनुचित लाभ देने के लिए 2.5 लाख रुपये स्वीकार किए। इसके बाद अधिकारी और कंपनी निदेशक को हिरासत में लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित रिश्वत लेनदेन में अन्य व्यक्तियों की क्या भूमिका थी और क्या यह विमानन से जुड़ी मंजूरियों के किसी बड़े इंतजाम का हिस्सा था। सीबीआई ने अधिकारी के खिलाफ मिली सूचना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद छापेमारी की कार्रवाई भी की। अधिकारियों के अनुसार, रिश्वत स्वीकार किए जाने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कंपनी को भी मामले में नामजद किया गया है। जांच पूरी होने तक आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

सुरक्षा पर सवाल

इस मामले का संबंध एयरवर्थीनेस प्रमाणन से होने के कारण इसकी जांच विमानन सुरक्षा के नियामकीय पहलू से भी जुड़ती है। एयरवर्थीनेस प्रमाणपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित विमान निर्धारित सुरक्षा और परिचालन मानकों के अनुरूप हों। सीबीआई के आरोप के मुताबिक, DGCA अधिकारी ने कथित रिश्वत के बदले ऐसे प्रमाणन में अनुचित लाभ देने की कोशिश की। हालांकि, जांच के इस चरण में यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी विमान की सुरक्षा से वास्तविक रूप से समझौता हुआ था। अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में जांच होगी और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी स्पष्ट होनी है।

सीबीआई अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, कथित रिश्वत लेनदेन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी ने बताया है कि आगे की जांच का एक उद्देश्य यह पता लगाना है कि पैसे का कथित लेनदेन केवल इस मामले तक सीमित था या विमानन संबंधी अन्य नियामकीय मंजूरियों से भी जुड़ा था। गिरफ्तार DGCA अधिकारी को पूछताछ के लिए राष्ट्रीय राजधानी ले जाने के लिए एजेंसी अदालत से ट्रांजिट रिमांड मांगने की प्रक्रिया में है। फिलहाल मामले में सामने आए सभी आरोप सीबीआई की जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief