वर्दी पर सवाल! महिला से दुष्कर्म के आरोप में 3 पुलिसकर्मी निलंबित
महिला से दुष्कर्म के आरोप में 3 पुलिसकर्मी निलंबित हुए। हाई कोर्ट ने महिला की सुरक्षा, हिरासत के कानूनी आधार और जांच पर सरकार से जवाब मांगा।
प्रतीकात्मक फोटो
हजारीबाग, झारखंड। हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रह रही एक महिला ने 3 पुलिसकर्मियों पर महिला से दुष्कर्म का आरोप लगाया है। मामला झारखंड हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया, जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सीलबंद रिपोर्ट में महिला के बयान के आधार पर गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कांस्टेबल रंजीत महतो, रेनू बेंजामिन और वारिस कच्छप को निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अदालत ने महिला की सुरक्षा और उसे डिटेंशन सेंटर में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी निर्देश दिए हैं। [1]
पुलिस पर कार्रवाई
महिला से दुष्कर्म के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने अदालत को 3 पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी दी। तीनों कांस्टेबल को निलंबित करने के साथ उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। झारखंड हाई कोर्ट के समक्ष गृह सचिव वंदना दादेल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। सरकार की ओर से बताया गया कि महिला की सुरक्षा के लिए 6 कांस्टेबल तैनात किए गए हैं, जिनमें 3 महिला और 3 पुरुष पुलिसकर्मी शामिल हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की जांच रिपोर्ट को भी सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने रखा गया। आरोपों की जांच अभी प्रक्रिया में है।
इस मामले में अदालत ने एफआईआर में लगाई गई धाराओं को लेकर भी सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। महिला की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जानकारी भी अदालत को दी गई। महिला से दुष्कर्म के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। अदालत के सामने राज्य सरकार को पुलिस कार्रवाई के साथ महिला की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी देनी पड़ी।
हिरासत पर सवाल
मामले का दूसरा अहम पहलू महिला की लंबे समय से जारी हिरासत है। महिला को 2018 में बच्चे के अपहरण से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था और उसे 2 साल की सजा हुई थी। विदेशी अधिनियम से जुड़े मामले में 2021 में उसे 3 साल की सजा सुनाई गई। सजा पूरी होने के बाद उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेजा गया, क्योंकि पुलिस ने उसे बांग्लादेशी नागरिक बताया था। 2025 के अंत में वह डिटेंशन सेंटर से भाग गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज हुआ, जिसमें 2026 में उसे बरी कर दिया गया।
झारखंड हाई कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब महिला को 2026 में विदेशी अधिनियम के मामले में बरी कर दिया गया, तो उसे अब भी जेल या डिटेंशन सेंटर में किस कानूनी अधिकार के तहत रखा गया है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए 2023 से विदेश मंत्रालय को पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला। अदालत ने केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। इस तरह महिला से दुष्कर्म के आरोपों के साथ उसकी हिरासत का कानूनी आधार भी मामले का अहम हिस्सा बन गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की गई है।
जवाब तलब
महिला की शिकायत की जांच के लिए झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग की टीम को लगाया गया। टीम ने महिला से बातचीत कर उसका बयान दर्ज किया और रिपोर्ट अदालत के सामने सीलबंद लिफाफे में पेश की। इसी रिपोर्ट में महिला के बयान के आधार पर 3 पुलिसकर्मियों पर महिला से दुष्कर्म के आरोपों का उल्लेख किया गया। मामला सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से भी जुड़ा है। याचिका में महिला को डिटेंशन सेंटर में रखे जाने को चुनौती दी गई और तत्काल रिहाई तथा स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
फिलहाल महिला से दुष्कर्म के आरोपों पर पुलिस कार्रवाई हो चुकी है और 3 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दूसरी ओर, हाई कोर्ट महिला की हिरासत के कानूनी आधार और उसे विदेश भेजने की लंबित प्रक्रिया पर सरकार से जवाब मांग रहा है। महिला की सुरक्षा के लिए 6 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी। आगे की सुनवाई में जांच की प्रगति, हिरासत के कानूनी आधार और महिला की सुरक्षा से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। 15 अक्टूबर की सुनवाई से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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