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सुप्रीम कोर्ट सख्त: अतिक्रमण मुक्त रहें फुटपाथ, 5 शहरों से शुरुआत

फुटपाथ को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 5 शहरों से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। जानिए अतिक्रमण, जिम्मेदारी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े निर्देश।

By नीरज त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 5 शहरों की पहचान करे, जहां हर सड़क के साथ अतिक्रमण मुक्त और स्पष्ट रूप से चिह्नित फुटपाथ उपलब्ध कराने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके। 5 अक्टूबर 2026 को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी किस केंद्रीय प्राधिकरण की होगी।  [1]

अदालत का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि इस काम के लिए तय की जाने वाली केंद्रीय अथॉरिटी के पास पर्याप्त बजट, कर्मचारी और जरूरी बुनियादी ढांचा होना चाहिए। अदालत का जोर इस बात पर है कि सड़क के साथ फुटपाथ स्पष्ट रूप से चिह्नित हो और उस पर अतिक्रमण न हो। केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने मामले में पक्ष रखा। पीठ ने उनसे जिम्मेदार प्राधिकरण के बारे में जानकारी मांगी। सरकारी वकील ने अदालत को जल्द जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

अदालत की चिंता केवल फुटपाथ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे पैदल यात्रियों के लिए उपयोगी और सुरक्षित बनाए रखने से भी जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार शुरुआत के लिए 5 शहरों की पहचान की जाएगी और वहां पायलट प्रोजेक्ट के जरिए व्यवस्था को जमीन पर लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर सड़क के साथ पैदल चलने वालों के लिए स्पष्ट रास्ता उपलब्ध हो। इस शुरुआती पहल से व्यवस्था को लागू करने का तरीका समझने और आगे की कार्रवाई के लिए ठोस आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

शुरुआत की तैयारी

केंद्र को अब 5 शहरों की पहचान करने के साथ यह भी बताना होगा कि इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए कौन सा केंद्रीय प्राधिकरण जिम्मेदार होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिम्मेदार अथॉरिटी के पास पर्याप्त बजट, कर्मचारी और जरूरी बुनियादी ढांचा होना अनिवार्य है। इससे संकेत मिलता है कि फुटपाथ से जुड़ी व्यवस्था को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुने जाने वाले शहर इस पहल की शुरुआती कड़ी होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब अदालत ने पैदल चलने वालों की सुरक्षा को सुनवाई का अहम विषय बनाया है। 5 शहरों से शुरू होने वाला पायलट प्रोजेक्ट पूरे देश में ऐसी व्यवस्था लागू करने की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन अभी अदालत ने केवल शुरुआत के लिए शहरों की पहचान करने को कहा है। आगे की प्रक्रिया केंद्र की ओर से दी जाने वाली जानकारी और जिम्मेदार प्राधिकरण तय होने के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल अदालत का संदेश साफ है कि फुटपाथ अतिक्रमण से मुक्त और पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट होना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief