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सरल विशारद की साहित्यिक यात्रा पर विमर्श व सम्मान समारोह 11 अक्टूबर को 

सरल विशारद की साहित्यिक यात्रा पर 11 अक्टूबर को बीकानेर में विमर्श होगा। डॉ. नंदकिशोर आचार्य अध्यक्षता करेंगे और हरिगोपाल हर्ष मुख्य अतिथि होंगे।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। वरिष्ठ कवि और आलोचक सरल विशारद की लंबी साहित्यिक यात्रा के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विमर्श तथा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 11 अक्टूबर, रविवार को शाम 5 बजकर 15 मिनट पर स्टेशन रोड स्थित जुबली नागरी भंडार की महारानी सुदर्शन कला दीर्घा में होगा। समारोह के समन्वयक विप्लव व्यास ने बताया कि कार्यक्रम में साहित्य और रचनात्मक योगदान पर चर्चा की जाएगी। इस आयोजन का केंद्र सरल विशारद की साहित्य साधना और हिंदी तथा राजस्थानी साहित्य में उनकी भूमिका रहेगी। साहित्य प्रेमियों को उनके कार्य पर विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।

समारोह विवरण

समारोह की अध्यक्षता कवि और चिंतक डॉ. नंदकिशोर आचार्य करेंगे। वरिष्ठ चित्रकार हरिगोपाल हर्ष, जिन्हें सन्नू के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य अतिथि होंगे। आयोजन में सरल विशारद के साहित्यिक व्यक्तित्व, उनकी रचनात्मक दृष्टि और लंबे समय से जारी साहित्यिक सक्रियता पर विचार रखे जाएंगे। सरल विशारद हिंदी और राजस्थानी दोनों भाषाओं में लेखन करने वाले वरिष्ठ कवि, समालोचक और पत्रकार हैं। वे बीकानेर की साहित्यिक परंपरा से जुड़े रहे हैं और जनवादी चेतना तथा लोक परंपरा से प्रेरित कविता के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार प्रमुख माने जाते हैं।

साहित्यिक सफर

सरल विशारद की रचनाओं में आम लोगों के संघर्ष, सामाजिक विसंगतियां और वंचित वर्गों के अनुभव प्रमुखता से सामने आते हैं। उनकी चर्चित कृतियों में हिंदी कविता संग्रह 'क्योंकि वह जिन्दा है', राजस्थानी कविता संग्रह 'चेतो चेतो', 'अकाल में उत्सव', 'चौपड़े की चुड़ैलें', 'रुदादे सफर' और 'जोया देसाई काटेज' शामिल हैं। वे बीकानेर की मंचीय काव्य परंपरा से भी जुड़े रहे हैं, जहां हरीश भादाणी और भीम पांडिया जैसे कवियों के साथ साहित्यिक गोष्ठियां और कवि सम्मेलन आयोजित होते रहे। उनकी साहित्यिक पहचान कविता और आलोचना दोनों क्षेत्रों में बनी है।

सम्मान और योगदान

साहित्य और पत्रकारिता में सरल विशारद के योगदान को पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। राजस्थान साहित्य अकादमी ने वर्ष 2022 और 2023 के लिए उन्हें अमृत सम्मान हेतु चुना था। वर्ष 2020 में उन्हें कला और संस्कृति के प्रति योगदान के लिए परम्परा सम्मान भी प्रदान किया गया। सरल विशारद जनवादी लेखक संघ, राजस्थान की गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और प्रगतिशील तथा जनपक्षधर साहित्य का समर्थन करते हैं। 11 अक्टूबर का समारोह उनकी दीर्घ साहित्यिक यात्रा पर विचार साझा करने और उनके योगदान का सम्मान करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने का अवसर प्रदान करेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief