अवैध हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इंटरनेट और मेट्रो बहाली के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर कानूनी प्रक्रिया और मेट्रो, रेल, इंटरनेट व आवाजाही सामान्य रखने के निर्देश स्पष्ट किए।
प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर 2026 को सुनवाई की। शनिवार को राजधानी में करीब 41000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और लगभग 7000 लोगों को हिरासत में लिया गया। अदालत ने शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हिरासत में कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया। साथ ही मेट्रो, रेल, इंटरनेट और शहर में लोगों की आवाजाही सामान्य रखने के निर्देश दिए। अदालत की सुनवाई का केंद्र सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन रहा। [1]
अदालत के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय जरूरत के अनुसार उनका संचालन नियंत्रित किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाते समय आम नागरिकों को होने वाली परेशानी का ध्यान रखना जरूरी है। इंटरनेट सेवाओं को कानून के अनुरूप निर्बाध रखने और यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में लेने पर रोक की बात कही। अदालत ने न्यायालय परिसरों के आसपास प्रतिबंधात्मक नोटिस हटाने का निर्देश भी दिया।
हिरासत के सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया और कई इलाकों में आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इन कदमों से शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार पर असर पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से इन शिकायतों पर जवाब मांगा। अदालत ने परिवहन सेवाओं पर लागू प्रतिबंधों और पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन से जुड़ी जानकारी भी तलब की। मामले में दिल्ली पुलिस, मेट्रो प्रशासन और रेलवे अधिकारियों को अपनी कार्रवाई का विवरण देना है। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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