नेताओं की रिहाई के बाद भी CJP का आंदोलन जारी, अदालत की शर्त बरकरार
नेताओं की रिहाई का आदेश करीब 24 घंटे की हिरासत के बाद आया। CJP प्रमुखों को एक साल शांति बनाए रखने की शर्त पर छोड़ा गया, पुलिस कार्रवाई चर्चा में।
CJP नेताओं की रिहाई
दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संयोजक अभिजीत दिपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रंका को हिरासत में लिए जाने के करीब 24 घंटे बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रिहा करने का आदेश दिया। तीनों नेताओं को एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर छोड़ा गया। वे 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। उनकी रिहाई के बाद आंदोलन जारी रखने की बात कही गई। [1]
रिहाई की शर्त
अदालत ने तीनों नेताओं को एक वर्ष तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया। CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने इसकी जानकारी दी। दिल्ली पुलिस ने तीनों को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं 126 और 170 के तहत निवारक हिरासत में लिया था। इन प्रावधानों का संबंध शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई और संज्ञेय अपराध रोकने से है। रिहाई के आदेश के बाद तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की जानकारी सामने आई। इस शर्त के तहत उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी।
विमान से हिरासत
अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को मुंबई से दिल्ली पहुंची उड़ान से उतरने के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था। एयर इंडिया की उड़ान AI 2428 सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर उतरी और विमान को दूर स्थित बे R12 पर ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान वहां मौजूद थे। तीनों को विमान के भीतर से अपने साथ ले जाया गया। CJP ने इस कार्रवाई की आलोचना की थी और इसे प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने की कोशिश बताया था।
आंदोलन की वजह
तीनों नेताओं की रिहाई ऐसे समय हुई जब CJP ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। पार्टी और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी और राजधानी में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े किए थे। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में करीब 7000 लोगों को हिरासत में लिया गया। नेताओं की रिहाई के बाद भी CJP ने प्रदर्शन जारी रखने का रुख रखा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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