नारी सम्मान का संदेश, नवरात्रि में 9 दिन कन्या पूजन किया जाएगा
नवरात्रि में अनूठी पहल, 9 दिन तक कन्याओं के सम्मान का विशेष आयोजन
कन्या पूजन को नवमी तक सीमित रखने के बजाय वन्देमातरम मातृशक्ति टीम की अनूठी पहल, 9 दिन तक अलग अलग मोहल्लों में होगा कन्याओं का सम्मान।
कन्या पूजन
बीकानेर, राजस्थान। नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा को नई सोच के साथ आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वन्देमातरम मातृशक्ति टीम ने 9 दिवसीय कन्या पूजन महोत्सव की शुरुआत की है। इस पहल के तहत नवरात्रि के लगातार 9 दिनों तक बीकानेर के अलग अलग मोहल्लों में कन्याओं का पूजन और सम्मान किया जाएगा। आमतौर पर नवमी के दिन होने वाले कन्या पूजन को हर दिन से जोड़ने की इस पहल का उद्देश्य कन्याओं के प्रति श्रद्धा और आदर को व्यापक बनाना है। आयोजन का पहला दिन बाबा रामदेव जी मंदिर में शुरू हुआ। [विडियो]
नई पहल
कन्या पूजन महोत्सव के प्रथम दिन जेलवेल टंकी के पास स्थित बाबा रामदेव जी मंदिर में धार्मिक श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 21 कन्याओं का पूजन अर्चन किया गया और उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप मानकर सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में विजय कोचर, वन्देमातरम मातृशक्ति टीम की अध्यक्ष कामिनी विमल भोजक मैया, ममता सिंह, सूरज राठौड़, जसोदा खत्री, राजकुमारी व्यास और भवानी सुथार सहित उपस्थित सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने श्रद्धापूर्वक कन्याओं के चरणों में नमन किया और मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस आयोजन के जरिए टीम ने परंपरा के साथ सामाजिक संदेश भी जोड़ा।
नौ दिन आराधना
टीम की इस पहल के पीछे विचार है कि जब नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की 9 दिनों तक आराधना की जाती है, तो कन्याओं को मां का स्वरूप मानकर उनका सम्मान भी हर दिन क्यों न किया जाए। इसी सोच के साथ कन्या पूजन को केवल नवमी के एक दिन तक सीमित न रखकर पूरे नवरात्रि पर्व का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया है। कन्या पूजन महोत्सव के अंतर्गत अलग अलग मोहल्लों में होने वाले आयोजनों के माध्यम से कन्याओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और सत्कार की भावना को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा। यह पहल धार्मिक परंपरा को दैनिक व्यवहार से जोड़ती है।
सम्मान का संदेश
वन्देमातरम मातृशक्ति टीम के अनुसार यह आयोजन केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि नारी सम्मान, सनातन संस्कार और समाज में कन्याओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास है। टीम का मानना है कि जिस समाज में कन्याओं को सम्मान मिलता है, वहां संस्कार, संवेदना और संस्कृति की जड़ें मजबूत होती हैं। कन्या पूजन के माध्यम से समाज को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि बेटियों के प्रति आदर केवल किसी पर्व या विशेष तिथि तक सीमित नहीं होना चाहिए। कन्या पूजन महोत्सव का मूल संकल्प भी यही है कि नवरात्रि के 9 दिनों की श्रद्धा जीवनभर कन्या सम्मान के संस्कार में बदले।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।