नारीशक्ति के स्वास्थ्य की पहल, छात्राओं को कैंसर जागरूकता की सीख
बीकानेर में नवरात्रि पर छात्राओं के लिए कैंसर जागरूकता सत्र हुआ। डॉ. पंकज टांटिया ने स्तन परीक्षण, सर्वाइकल कैंसर बचाव और एचपीवी टीके की जानकारी दी।
कैंसर जागरूकता
बीकानेर, राजस्थान। नवरात्रि के प्रथम दिन मातृशक्ति के स्वास्थ्य और सुरक्षा का संदेश देते हुए छात्राओं के लिए कैंसर जागरूकता का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। नीट प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाने वाले जॉनी सर, जगदीश सेवग सर और डॉ. शांतनु सर की ट्यूशन कक्षाओं में अध्ययनरत 16 से 20 वर्ष आयु वर्ग की छात्राओं ने इसमें भाग लिया। स्नेहलता व्यास मेमोरियल ट्रस्ट और कैंसर रिलीफ सोसायटी उम्मीद के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान, संभावित लक्षणों तथा बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। [विडियो]
स्तन स्वास्थ्य
सत्र का संचालन आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. पंकज टांटिया ने किया। उन्होंने ऑडियो विजुअल माध्यम से छात्राओं को स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान और स्वयं स्तन परीक्षण की सामान्य प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि महिलाओं को अपने स्तनों के सामान्य आकार, बनावट और स्वरूप से परिचित रहना चाहिए, ताकि किसी असामान्य बदलाव पर ध्यान दिया जा सके। मासिक धर्म होने वाली महिलाओं को उसके समाप्त होने के बाद हर महीने स्वयं परीक्षण करने की जानकारी दी गई। जिन महिलाओं को मासिक धर्म नहीं आता, वे महीने की एक निश्चित तारीख चुन सकती हैं।
स्वयं स्तन परीक्षण
डॉ. टांटिया ने स्वयं स्तन परीक्षण के 3 तरीके समझाए। इनमें दर्पण के सामने देखकर, स्नान करते समय और पीठ के बल लेटकर स्तनों की जांच करना शामिल है। उन्होंने स्तन और बगल के क्षेत्र को व्यवस्थित तरीके से हल्के, मध्यम और गहरे दबाव से महसूस करने की सामान्य प्रक्रिया बताई। दर्पण के सामने स्तनों के आकार, त्वचा, निप्पल की स्थिति, लालिमा, गड्ढे, झुर्रियों और सूजन जैसे बदलावों पर ध्यान देने की जानकारी दी गई। निप्पल से असामान्य स्राव होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयं परीक्षण नियमित चिकित्सकीय जांच या सुझाई गई मैमोग्राफी का विकल्प नहीं है।
समय पर जांच
डॉ. पंकज टांटिया ने बताया कि स्तन में गांठ, लगातार दर्द, आकार या त्वचा में बदलाव, लालिमा, निप्पल में परिवर्तन अथवा असामान्य स्राव दिखाई देने पर घबराने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्तन में हर बदलाव कैंसर नहीं होता, लेकिन असामान्यता की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। इस कैंसर जागरूकता सत्र में छात्राओं को शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने और सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और युवतियों में स्वास्थ्य संबंधी संकोच कम करना तथा शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
सर्वाइकल बचाव
प्रशिक्षण में छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण की भूमिका के बारे में भी बताया गया। उचित आयु और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीका लगवाने तथा निर्धारित दिशा निर्देशों के मुताबिक जांच करवाने के महत्व पर चर्चा हुई। छात्राओं को समझाया गया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर संकोच करने के बजाय परिवार और चिकित्सक से खुलकर बात करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के महत्वपूर्ण उपाय हैं। इस जानकारी का उद्देश्य छात्राओं को वैज्ञानिक तथ्यों से परिचित कराना और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करना था।
स्वास्थ्य संदेश
स्नेहलता व्यास मेमोरियल ट्रस्ट के संरक्षक किशन व्यास ने बताया कि ट्रस्ट महिलाओं और युवतियों में कैंसर जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और उचित उपचार की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। उनके अनुसार, यदि एक छात्रा जागरूक होकर अपनी माता, बहन, रिश्तेदारों और आसपास की महिलाओं तक सही संदेश पहुंचाती है, तो अभियान का प्रभाव बढ़ सकता है। उन्होंने इस पहल को परिवारों तक स्वास्थ्य संबंधी उपयोगी जानकारी पहुंचाने का माध्यम बताया और महिलाओं को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के प्रति प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षा और सुरक्षा
जॉनी सर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को स्वास्थ्य और समाज के प्रति संवेदनशील बनाना भी है। जगदीश सेवग ने कहा कि कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों और संकोच को वैज्ञानिक जानकारी से दूर किया जा सकता है। डॉ. शांतनु ने शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया। विनय थानवी ने कहा कि नवरात्रि में मातृशक्ति की आराधना के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाना भी जरूरी है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और परिवारों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
छात्राओं की भागीदारी
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने स्तन कैंसर, स्वयं स्तन परीक्षण, सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी टीकाकरण से जुड़े सवाल पूछे। डॉ. पंकज टांटिया ने उनकी जिज्ञासाओं का सरल और वैज्ञानिक भाषा में समाधान किया। आयोजकों ने छात्राओं के माध्यम से परिवारों और समाज तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने की जरूरत बताई। इस कैंसर जागरूकता पहल का मुख्य संदेश यही रहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए, किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह ली जाए और बचाव के प्रमाणित उपायों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। नवरात्रि पर आयोजित यह सत्र मातृशक्ति के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास रहा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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