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राजमार्गों पर गौवंश की सुरक्षा: रोटरी क्लब का रेडियम बेल्ट अभियान

रेडियम बेल्ट अभियान के तहत बीकानेर जयपुर राजमार्ग पर पहले दिन 50 से अधिक गौवंश को बेल्ट पहनाई गईं। जानें इसका उद्देश्य, सुरक्षा और आगे की योजना।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg रेडियम बेल्ट अभियान

रेडियम बेल्ट अभियान

बीकानेर, राजस्थान। रात में राजमार्गों पर विचरण करने वाले गौवंश की कम दृश्यता से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने के उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स ने रेडियम बेल्ट अभियान शुरू किया है। इस पहल में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर में प्रोफेसर रोटे डॉ. आर.के. धुरिया की भूमिका रही। पशुओं से जुड़ी समस्याओं के अनुभव और विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता को सामाजिक सेवा से जोड़ने के विचार पर उन्होंने क्लब सदस्यों से चर्चा की। इसके बाद अंधेरे में गौवंश की दृश्यता बढ़ाने के लिए रेडियम बेल्ट इस्तेमाल करने का प्रस्ताव सामने आया।   [विडियो]

रात की चुनौती

रात में सड़क पर बैठे या विचरण करते गौवंश को वाहन चालक कई बार पर्याप्त दूरी से नहीं देख पाते। इससे पशुओं और वाहनों के बीच टक्कर का खतरा बना रहता है। रेडियम बेल्ट पर वाहन की हेडलाइट पड़ने से प्रकाश परावर्तित होता है, जिससे अंधेरे में पशु की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इस पहल का उद्देश्य दृश्यता बढ़ाकर दुर्घटना का जोखिम कम करने में सहायता करना है। हालांकि, रेडियम बेल्ट दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देती। सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों की सतर्कता और परिस्थितियों के अनुसार गति बनाए रखना भी जरूरी है।

अभियान का शुभारंभ राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने एक गाय के गले में रेडियम बेल्ट पहनाकर किया। इसके बाद उन्होंने अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। डॉ. व्यास ने कहा कि रात में गौवंश की कम दृश्यता सड़क दुर्घटनाओं का एक कारण बन सकती है। रेडियम बेल्ट से वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशुओं का पहले पता चल सकता है। उन्होंने इस पहल में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। अभियान में विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता को सामाजिक सेवा गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

अभियान का आरंभ

अभियान को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। पहले चरण में उन राजमार्गों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां गौवंश की मौजूदगी से हादसों का खतरा रहता है। शुरुआती अनुभव और परिणामों के आधार पर आगे की योजना तय की जाएगी। फिलहाल सड़क पर विचरण करने वाली गायों को रेडियम बेल्ट पहनाने से शुरुआत हुई है। अभियान का विस्तार उपलब्ध संसाधनों और प्राप्त अनुभव के अनुसार किया जाएगा। अगले चरणों में बेल्ट के उपयोग, उनकी स्थिति और व्यावहारिक परिणामों का आकलन करने से अलग अलग सड़क परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता समझने में मदद मिल सकती है।

अभियान संयोजक डॉ. आर.के. धुरिया के नेतृत्व में राजुवास के विद्यार्थियों और रोटरी रॉयल्स के सदस्यों की टीम बीकानेर जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नौरंगदेसर तक पहुंची। पहले दिन 50 से अधिक गौवंश को रेडियम बेल्ट पहनाई गईं। क्लब के अनुसार, आने वाले दिनों में बीकानेर से जुड़े अन्य प्रमुख राजमार्गों पर भी अभियान चलाने की योजना है। रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स के अध्यक्ष इंजी. विपिन लड्ढा ने कहा कि सड़क पर गौवंश की मौजूदगी से होने वाली दुर्घटनाएं पशुओं, वाहन चालकों और राहगीरों के लिए जोखिम पैदा करती हैं।

आगे की योजना

अभियान में क्लब के कोषाध्यक्ष राजेश खत्री, रोटे राजेश पारीक तथा बीकानेर फ्रूट वेजिटेबल मर्चेंट्स एंड कमीशन एजेंट्स सोसाइटी के अध्यक्ष रोटे मुकुल झांब सहित अन्य सदस्य शामिल हुए। राजुवास के विद्यार्थियों ने भी रेडियम बेल्ट लगाने में भाग लिया। इंजी. विपिन लड्ढा के अनुसार, क्लब विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों की विशेषज्ञता को सामाजिक सेवा से जोड़कर स्थानीय समस्याओं पर काम करने का प्रयास कर रहा है। आने वाले चरणों में बेल्ट की स्थिति और व्यावहारिक नतीजों का आकलन उपयोगी होगा। रेडियम बेल्ट का उद्देश्य रात में गौवंश की दृश्यता बढ़ाना और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम घटाने में मदद करना है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief