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पैतृक जमीन विवाद 1994 से जारी, गोविंद लाल ने प्रशासन से लगाई गुहार

पैतृक जमीन विवाद में 71 वर्षीय गोविंद लाल ने करीब 11 बीघा भूमि पर कथित कब्जे की जांच, राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन और परिवार की सुरक्षा की मांग की।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। कनवास निवासी 71 वर्षीय गोविंद लाल पुत्र स्वर्गीय देवी लाल ने अपनी पैतृक कृषि भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे पैतृक जमीन विवाद में प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनके प्रार्थना पत्र के अनुसार, करीब 11 बीघा जमीन को लेकर वर्ष 1994 से विवाद जारी है। गोविंद लाल का दावा है कि भूमि उनके परिवार के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रही है, लेकिन इस पर अन्य लोगों ने कथित रूप से कब्जा कर रखा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

प्रार्थना पत्र में विवादित भूमि का पुराना खसरा नंबर 1420/2338 और वर्तमान खसरा नंबर 1112, 1122 तथा 1123 बताया गया है। गोविंद लाल का आरोप है कि अपने अधिकार की मांग करने पर उन्हें गाली गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां मिलीं। शिकायत में वर्ष 1994 में खेत में बोई गई फसल को नुकसान पहुंचाने का भी उल्लेख है। उनके अनुसार, इस मामले में 19 सितंबर 1994 को कनवास थाने में एफआईआर संख्या 157 दर्ज हुई थी। 

रिकॉर्ड जांच की मांग

गोविंद लाल ने वर्ष 2005 और 2014 के राजस्व वादों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने 28 जुलाई 2026 को पारित आदेश की जांच कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में जमाबंदी, नक्शों और अन्य राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराने तथा कथित अतिक्रमण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता चाहते हैं कि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में किसी भी अनियमित बदलाव को रोका जाए और मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहा पैतृक जमीन विवाद अब भी उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

गोविंद लाल ने प्रशासन से भूमि का कब्जा दिलाने और अपने परिवार की जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्हें अपनी पैतृक जमीन के अधिकार के लिए प्रयास करने पड़ रहे हैं। अब उन्हें प्रशासन की जांच और न्यायोचित कार्रवाई से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व, कथित कब्जे और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित राजस्व अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief