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महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता पर बैठक में हुई अहम चर्चा

हुनर का पेड़ बना खास आकर्षण

मऊ में महिला सशक्तीकरण पर जागरूकता बैठक हुई। महिलाओं के अधिकार, सरकारी योजनाएं, लैंगिक समानता पर सार्थक चर्चा हुई और हुनर का पेड़ मुख्य आकर्षण रहा।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg महिला सशक्तीकरण जागरूकता कार्यक्रम

महिला सशक्तीकरण जागरूकता कार्यक्रम

मऊ, उत्तर प्रदेश। महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से शारदा सेवा संस्थान ने 15 और 16 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के अवसर पर जागरूकता बैठक आयोजित की। इसमें युवाओं की अभिभावक माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के योगदान, अधिकारों और सामाजिक भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। बैठक में महिलाओं की पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक गतिविधियों और समुदाय के विकास में उनकी भागीदारी पर चर्चा हुई। संस्थान ने महिलाओं की प्रतिभा पहचानने, उन्हें उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने और परिवार तथा समाज के निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।  [विडियो]

महिलाओं की भूमिका

बैठक को संबोधित करते हुए संस्थान के महासचिव और कार्यक्रम निदेशक रुद्र प्रताप ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं कृषि, पशुपालन, घरेलू कामकाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधार हैं। इसके बावजूद उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसरों और निर्णय प्रक्रिया में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं के योगदान को उचित पहचान देने और उनकी सामाजिक स्थिति मजबूत करने की जरूरत बताई। महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में उन्होंने ग्रामीण जीवन में महिलाओं के श्रम और जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया। बैठक का उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं और सामाजिक भूमिका पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम समन्वयक मोहम्मद आसिफ ने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने परिवार और समुदाय से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। साथ ही युवाओं के व्यक्तित्व विकास में माताओं की भूमिका और परिवार के भीतर लैंगिक समानता के महत्व पर जोर दिया। महिला सशक्तीकरण को प्रभावी बनाने के लिए महिलाओं को उपलब्ध अवसरों की जानकारी देना और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी बताया गया। बैठक में माताओं की भूमिका को परिवार के विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

हुनर की पहचान

कार्यक्रम के अंत में हुनर का पेड़ नामक गतिविधि आयोजित की गई। इसमें महिलाओं ने रंग बिरंगी पत्तियों पर अपने हुनर के नाम लिखे। सिलाई, खेती, पशुपालन और खाना बनाना जैसे कौशल इसमें शामिल थे। जिन महिलाओं को कोई नया हुनर सीखना था, उन्होंने फल के रूप में उस कौशल को चिह्नित किया। इस गतिविधि ने महिलाओं को अपनी क्षमताएं पहचानने और दूसरों के हुनर का सम्मान करने का अवसर दिया। महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह पहल प्रतिभाओं को सामने लाने और आपसी सीखने की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने का माध्यम बनी।

शारदा सेवा संस्थान के अनुसार ग्रामीण महिलाओं का सशक्तीकरण केवल महिला विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध बच्चों की शिक्षा, युवाओं के बेहतर भविष्य और पूरे समाज के समावेशी विकास से भी है। कार्यक्रम में मोहम्मद आसिफ, स्नेहा, कृतिका राय, पवन सहित कई कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में अभिभावक माताएं उपस्थित रहीं। महिला सशक्तीकरण के लिए अधिकारों की जानकारी, कौशल की पहचान और सामाजिक निर्णयों में भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया। बैठक का उद्देश्य महिलाओं के योगदान को सम्मान देना और परिवार तथा समुदाय में समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief