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साहित्यिक काव्य गोष्ठी में 2 पुस्तकों का विमोचन, कवियों ने बांधा समां

भीलवाड़ा की साहित्यिक काव्य गोष्ठी में नवरात्रि, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों पर कविताएं प्रस्तुत हुईं। 2 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

By अजय त्यागी
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पुस्तकों का विमोचन

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। जिला साहित्यकार परिषद की मासिक साहित्यिक काव्य गोष्ठी सिन्धुनगर स्थित हेमू कालानी सिन्धी शिक्षण संस्था परिसर में आयोजित हुई। नवरात्रि की भक्ति, दुर्गा माता की महिमा, सामाजिक सरोकारों और जीवन के विविध अनुभवों पर आधारित रचनाओं ने साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बनाया। कवियों ने गजल, गीतिका, गीत और मुक्त छंद के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता दयाराम मेठानी ने की, जबकि महेंद्र शर्मा ने संचालन किया। आयोजन के दौरान परिषद के 2 सदस्यों की नवप्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।  [विडियो]

कविताओं में जीवन

इस साहित्यिक काव्य गोष्ठी में बंसीलाल पारस ने जीवन की विडंबनाओं और आंखों के हंसने रोने के भाव अपनी रचना में प्रस्तुत किए। ओम उज्ज्वल ने नवरात्रि की महिमा पर कविता सुनाई, जबकि श्यामसुंदर तिवारी ने माता के 51 शक्तिपीठों पर आधारित रचना प्रस्तुत की। अपेक्षा पारीक ने प्रेम और वफा की भावनाओं को शब्द दिए। दीपिका शर्मा ने पेड़ों की कटाई और घटती हरियाली के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गोपाल शर्मा ने गांव की गलियों, चौपाल और तारों की छांव के जरिए ग्रामीण जीवन की स्मृतियां जीवंत कीं। नरेंद्र वर्मा ने बढ़ती उम्र के संघर्ष और दर्द को कविता में अभिव्यक्त किया।

सामाजिक सरोकार

गोष्ठी में राजेश मित्तल ने दुख के बीच भावनाओं को व्यक्त करने का संदेश दिया। महेंद्र शर्मा ने दूसरों के दुख को अपना दर्द समझने की संवेदनशीलता पर रचना प्रस्तुत की। अध्यक्ष दयाराम मेठानी ने नफरत और बढ़ते वैमनस्य के बीच प्रेम तथा सद्भाव की आवश्यकता को रेखांकित किया। जयप्रकाश भाटिया ने कली और पुष्प के अंतर पर आधारित कविता सुनाई, जबकि अजीज जख्मी ने जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों को अपनी रचना में प्रस्तुत किया। इस साहित्यिक काव्य गोष्ठी में अलग अलग विषयों पर रचनाओं के जरिए मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन के अनुभवों को अभिव्यक्ति मिली। कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को विभिन्न भावों से जोड़ा।

पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में साहित्यकार ओम उज्ज्वल के गीत संग्रह माटी की महक और श्यामसुंदर तिवारी के सचित्र बाल कविता संग्रह खिलते फूल महकते बच्चे का विमोचन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने दोनों पुस्तकों में संकलित रचनाओं की सराहना की। बाल कविता संग्रह में चित्रों के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। इस साहित्यिक काव्य गोष्ठी के दौरान साहित्यकारों ने रचनात्मक लेखन और साहित्यिक गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम ने कविता, भक्ति, पर्यावरण और सामाजिक संवेदनाओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief