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फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस की कार्रवाई, 10 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ है। अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर ठगने के आरोप में 10 लोग गिरफ्तार हुए, जांच जारी है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg फर्जी कॉल सेंटर

फर्जी कॉल सेंटर

जयपुर, राजस्थान। अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने के नाम पर कथित ऑनलाइन ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भांकरोटा थाना क्षेत्र में खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान मौके से 19 मोबाइल फोन, 12 लैपटॉप और अन्य उपकरण बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ में आईफोन की तकनीकी समस्या दूर करने के बहाने ग्राहकों को निशाना बनाने की बात सामने आई है। पुलिस अब कथित ठगी के तरीके, बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।  [1]   [विडियो]     

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, जयपुर में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस फर्जी कॉल सेंटर का पता चला। भांकरोटा इलाके में संचालित केंद्र पर पुलिस टीम ने दबिश दी और मौके पर मौजूद 10 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में हर्ष चौहान, उम्र 27 वर्ष, निवासी झज्जर, हरियाणा, कृष्ण, उम्र 28 वर्ष, निवासी गांव बक्सा, असम, और आकाशी लाबा, उम्र 30 वर्ष, निवासी दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया।

गिरफ्तार आरोपी 

गिरफ्तार आरोपियों में खोजा, उम्र 27 वर्ष, और केवी, उम्र 24 वर्ष, दोनों निवासी मेलयूरी, नागालैंड हैं। इनके अलावा निशांत, उम्र 24 वर्ष, निवासी गुरुग्राम, हरियाणा, रविंद्र कुमार, उम्र 31 वर्ष, निवासी महेंद्रगढ़, हरियाणा, अंकित, उम्र 24 वर्ष, निवासी झज्जर, हरियाणा, दिया गुरुजी, उम्र 25 वर्ष, निवासी दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल, और लिशीनी, उम्र 25 वर्ष, निवासी सेनापति, मणिपुर को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका की जांच कर रही है। गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है और मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

ठगी का तरीका

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ के मुताबिक, फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग X Lite सॉफ्टवेयर और TFN नंबरों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। आईफोन में तकनीकी समस्या आने पर उसे ठीक करने का भरोसा दिया जाता था। बातचीत के दौरान ग्राहकों को समाधान उपलब्ध कराने के नाम पर उलझाया जाता और उनसे शुल्क वसूला जाता था। पुलिस को संदेह है कि तकनीकी सहायता की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए किया जाता था। जांच अधिकारी अब कॉलिंग सिस्टम, लैपटॉप और मोबाइल फोन में उपलब्ध जानकारी की पड़ताल कर रहे हैं।

बैंक खातों की जानकारी

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि गिरोह में शामिल एक युवती बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों से बातचीत करती थी। वह ग्राहकों का विश्वास जीतने के बाद उनके बैंक खातों से संबंधित गोपनीय जानकारी हासिल करती थी। इसके बाद यह जानकारी कथित तौर पर टेलीग्राम ग्रुप में साझा की जाती थी। पुलिस के अनुसार, गिरोह के संचालक इस जानकारी का दुरुपयोग करके बैंक खातों से रकम निकाल लेते थे। इस तरह फर्जी कॉल सेंटर में तकनीकी सहायता के बहाने संपर्क करने और बैंक अधिकारी बनकर विश्वास हासिल करने की दोहरी रणनीति अपनाए जाने की आशंका है। पुलिस इन आरोपों की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

जांच का दायरा

पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी किए जाने का संदेह है। हालांकि, कथित ठगी की कुल रकम, प्रभावित ग्राहकों की संख्या और प्रत्येक आरोपी की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि टेलीग्राम ग्रुप का संचालन कौन करता था, बैंक खातों से निकाली गई रकम कहां भेजी जाती थी और इस गतिविधि में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। फर्जी कॉल सेंटर से जब्त 19 मोबाइल फोन और 12 लैपटॉप की जांच से नेटवर्क के संपर्कों और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief