दशहरा उत्सव में 65 फीट के रावण और कुंभकरण मेघनाथ के पुतलों का दहन
कोटा में दशहरा उत्सव के दौरान 65 फीट के रावण और 50 फीट के कुंभकरण व मेघनाथ के पुतलों का दहन हुआ। भव्य शोभायात्रा और रामलीला मंचन आकर्षण रहे।
पुतला दहन
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। आरके पुरम ए स्थित श्री महर्षि गौतम रामलीला पार्क से रावण चौक तक रामलीला आयोजन समिति की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। समिति अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा और महामंत्री गिरिराज गौतम के अनुसार, शोभायात्रा सेक्टर ए से होते हुए श्रीनाथपुरम पहुंची और रावण चौक पर संपन्न हुई। सुसज्जित बग्घियों में राम, लक्ष्मण और रामसेना की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। बैंड बाजों, डीजे की धुनों और रामभजनों के बीच श्रद्धालु नाचते गाते आगे बढ़े। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर यात्रा का स्वागत किया गया। दशहरा उत्सव में शोभायात्रा ने धार्मिक माहौल बनाया। [Video]
पुतलों का दहन
रावण चौक पर दशहरा उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे। यहां 65 फीट ऊंचे रावण और 50 फीट ऊंचे कुंभकरण तथा मेघनाथ के पुतलों को आतिशबाजी के बीच जलाया गया। पुतलों में आग लगते ही आसमान रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। आतिशबाजी की गूंज और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंजने लगा। मीडिया प्रभारी पीपी गुप्ता ने बताया कि दर्शकों ने पुतलों को जलते देखकर उत्साह व्यक्त किया। आयोजन के जरिए बुराई पर अच्छाई और अहंकार पर मर्यादा की विजय का संदेश दिया गया।
अतिथियों का संदेश
मुख्य संयोजक बालचंद फौजी के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, रेडक्रॉस के स्टेट चेयरमैन राजेश कृष्ण बिरला और स्टेट सेक्रेटरी जगदीश जिंदल अतिथि के रूप में शामिल हुए। पार्षद पुरुषोत्तम यादव और शंकर सिंह भी मौजूद रहे। राजेश कृष्ण बिरला ने यतो धर्मस्ततो जयः का अर्थ बताते हुए कहा कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि रामायण अहंकार के अंत, सदाचार की विजय और आदर्श समाज की स्थापना का संदेश देती है। दशहरा उत्सव के अवसर पर वक्ताओं ने मर्यादा और धर्म के महत्व को रेखांकित किया।
रामलीला का मंचन
रावण दहन के बाद रावण चौक पर बजरंग रामलीला लोक कला मंडल, नागौर के कलाकारों ने रावण वध और रामराज्याभिषेक का सजीव मंचन किया। पारंपरिक अभिनय, प्रभावशाली संवादों और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम की विजय से लेकर अयोध्या में उनके राज्याभिषेक तक की कथा प्रस्तुत की गई। श्रीराम के बाण से रावण के अंत का दृश्य सामने आते ही जय श्रीराम के उद्घोष गूंज उठे। इसके बाद अयोध्या लौटे श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग दिखाया गया। दशहरा उत्सव के इस आयोजन में त्याग, मर्यादा, न्याय और लोककल्याण पर आधारित रामराज्य की कल्पना प्रस्तुत की गई।
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