रामलीला में कॉकरोच का पुतला दहन, धार्मिक भावनाओं पर छिड़ा विवाद
कॉकरोच का पुतला जलाने पर आम आदमी पार्टी ने FIR की मांग की। आयोजकों ने इसे स्वच्छता का प्रतीक बताया, विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली। पीतमपुरा में दशहरा समारोह के दौरान रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला जलाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। श्री केशव रामलीला समिति के आयोजन में दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने इस पुतले का दहन किया। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने इसे धार्मिक परंपराओं से जुड़ा मामला बताते हुए आपत्ति जताई और आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। दूसरी ओर, आयोजकों ने पुतले को अस्वच्छता का प्रतीक बताते हुए इसके जलाने को स्वच्छता का सन्देश बताया। [1] [Video]
एफआईआर की मांग
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने समिति के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा, मंत्री कपिल मिश्रा और अन्य आयोजकों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने तथा समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने का आरोप लगाया। भारद्वाज का कहना है कि दशहरा जैसे धार्मिक आयोजन में कॉकरोच का पुतला शामिल करना सनातन परंपराओं को बदलने और धार्मिक मंच का राजनीतिक इस्तेमाल करने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो आम आदमी पार्टी अदालत का रुख करेगी।
आयोजकों की सफाई
श्री केशव रामलीला समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि कॉकरोच का पुतला गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य घरों, आसपास के इलाकों और समाज में सफाई का संदेश देना तथा स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियान को बढ़ावा देना था। आयोजकों ने इस पहल के पीछे किसी राजनीतिक मंशा से इनकार किया है। समिति के अनुसार, हर साल पारंपरिक पुतलों के साथ किसी सामाजिक बुराई को दर्शाने वाला एक अतिरिक्त पुतला भी जलाया जाता है। पहले नक्सलवाद और आतंकवाद जैसे विषयों को प्रतीकात्मक रूप दिया गया था।
मंत्री का बयान
कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने पुतले के दहन को सत्य की असत्य पर जीत के संदेश से जोड़ा। उन्होंने कॉकरोच का पुतला गंदगी और अराजकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि देश के खिलाफ काम करने वाली ताकतों की हार निश्चित है। इस बयान और पुतले के चयन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए। आम आदमी पार्टी ने आयोजन को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश बताया, जबकि आयोजकों ने इसे स्वच्छता जागरूकता की पहल कहा। इस तरह दशहरे का कार्यक्रम धार्मिक परंपरा, सार्वजनिक स्वच्छता और राजनीतिक प्रतीकों पर बहस का विषय बन गया।
विवाद का दायरा
कॉकरोच का पुतला हाल के दिनों में सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से भी जोड़ा जा रहा है। इस समूह के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुतले की तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपने संगठन के लिए मुफ्त प्रचार बताया। हालांकि, रामलीला समिति ने कहा कि पुतले का इस राजनीतिक आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। सौरभ भारद्वाज की शिकायत में आयोजन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो हटाने की मांग भी शामिल बताई गई है। फिलहाल विवाद के केंद्र में पुतले का उद्देश्य, धार्मिक भावनाओं को लेकर लगाए गए आरोप और आयोजकों की स्वच्छता संबंधी सफाई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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