धर्मसभा में आचार्य महावीर कीर्ति महाराज की साधना और विनय याद की गई
आचार्य महावीर कीर्ति महाराज के पदारोहण दिवस पर कोटा की धर्मसभा में संतों ने उनके तप, त्याग, विनय और साधना से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
धर्मसभा
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय में विराग वर्धन पावन वर्षायोग 2026 के अंतर्गत बुधवार को धर्मसभा आयोजित हुई। इसमें आचार्य महावीर कीर्ति महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस पर उनके जीवन, तप, त्याग और साधना का स्मरण किया गया। गणधर मुनिश्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने कहा कि महान संतों का जीवन आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके सिद्धांतों और साधना को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। सभा में श्रद्धालुओं ने संतों के विचार सुने। [Video]
साधना और विनय
मुनिश्री विवर्धन सागर महाराज ने आचार्य महावीर कीर्ति महाराज के व्यक्तित्व और साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक भव्य जीवों को मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित किया। वे प्रत्येक प्रतिमा के समक्ष 3 बार नमोस्तु करते और मन, वचन तथा काय से विनय प्रकट करते थे। उनके तप और साधना का प्रभाव इतना गहरा था कि एक बार आहार के समय उपस्थित अजैन लोग भी उनसे प्रभावित हुए। मुनिश्री ने बताया कि आचार्य महावीर कीर्ति महाराज शीर्षासन की मुद्रा में भी सामायिक करते थे। उनके जीवन प्रसंग साधना और अनुशासन की प्रेरणा देते हैं।
गुरु परंपरा
मुनिश्री ने बताया कि आचार्य विमल सागर महाराज, आचार्य महावीर कीर्ति महाराज के शिष्य थे। आचार्य सन्मति सागर महाराज और आर्यिका विजयमती माताजी ने भी उनसे अध्ययन किया था। मुनिश्री विवर्धन सागर महाराज के अनुसार, आचार्य महावीर कीर्ति महाराज ने अपने योग्य शिष्यों को दायित्व सौंपे और सल्लेखना की साधना करते हुए समाधिमरण प्राप्त किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। धर्मसभा में मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज ने भी जीवन प्रसंगों के जरिए गुरु परंपरा, संयम और साधना के महत्व को समझाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को इन मूल्यों पर चिंतन करने की प्रेरणा दी।
धर्म और संस्कार
धर्मसभा में उपस्थित संतों ने श्रावक और श्राविकाओं से जैन धर्म के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा और मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ श्रावक प्रेमचंद जैन पाटनी और टीकमचंद जैन पाटनी ने सपरिवार चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और शास्त्र भेंट कर किया। धर्मसभा में टीकम पाटनी, प्रेमचंद दगेरिया, पारस लुहाड़िया, चंद्रप्रकाश बंसल, अशोक पापड़ीवाल, अशोक पांडिया और सुरेंद्र पहाड़िया सहित समाज के कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन में श्रद्धालुओं ने धर्मोपदेश सुने और गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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