देशव्यापी हड़ताल 5 नवंबर को, मजदूर संगठन फिर सड़कों पर उतरने को तैयार
देशव्यापी हड़ताल का ऐलान करते हुए फ्रांस की यूनियनों ने 31 अक्टूबर को मार्च का आह्वान किया है। वेतन, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं पर सरकार का दबाव बढ़ा है।
शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शन
पेरिस, फ्रांस। फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के बाद मजदूर संगठनों और अन्य समूहों ने सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए नए मार्च और देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शनों में 410000 लोग शामिल हुए और सुरक्षा के लिए 70000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। प्रदर्शनकारी वेतन बढ़ाने, बढ़ती महंगाई से राहत और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। पिछले सप्ताह हुई लूटपाट और तोड़फोड़ के बाद इस बार भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। इसके बावजूद कई शहरों में छिटपुट झड़पें हुईं और आंदोलन थमा नहीं है। [1] [Video]
नई तारीखें
यूनियन नेताओं ने 31 अक्टूबर को फिर सड़कों पर उतरने और 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल करने की अपील की है। सुद एजुकेशन शिक्षक संगठन ने 31 अक्टूबर के मार्च में शामिल होने की बात कही, जबकि सीजीटी यूनियन ने अपना फैसला सप्ताह के दौरान लेने की बात कही। यूनियन नेताओं का कहना है कि नाराजगी अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। कर्मचारी, शिक्षक, अग्निशमनकर्मी और दूसरे समूह भी वेतन, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सरकारी सेवाओं को लेकर असंतोष जता रहे हैं। विरोध अब व्यापक सामाजिक असंतोष का रूप ले रहा है।
यूनियन की मांग
येलो वेस्ट आंदोलन ने भी 31 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन करने की अपील की है। यह आंदोलन 2018 में ईंधन करों के खिलाफ शुरू हुआ था। इसके समर्थकों ने नगरपालिकाओं और नेशनल असेंबली के बाहर धरना देने की बात कही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि असंतोष स्कूलों, विश्वविद्यालयों, खेतों, कामकाजी जगहों और स्थानीय समुदायों तक फैल रहा है। 2019 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने येलो वेस्ट विरोध के बाद ईंधन लागत घटाने के उपाय किए थे। इस बार सरकार के पास आर्थिक गुंजाइश कम है और प्रदर्शनकारी अब तक घोषित कदमों को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
मैक्रों पर दबाव
मैक्रों सरकार के लिए मांगें मानना आसान नहीं है। सरकारी वित्त पर दबाव है और राष्ट्रपति का कार्यकाल अगले अप्रैल में समाप्त होना है। उनकी मध्यमार्गी पार्टी के पास संसद में बहुमत भी नहीं है, जिससे बड़े कानून पारित कराना मुश्किल हो गया है। सरकार ने तनाव कम करने के लिए यूनियनों और छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू की है, लेकिन यूनियन नेताओं का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस जवाब नहीं मिला। विरोध के दौरान सुरक्षा संभालने के लिए पुलिस की बड़ी तैनाती की गई थी, मगर पुलिस यूनियनों ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर तैनाती लंबे समय तक जारी रखना कठिन होगा।
गिरफ्तारी
गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान 1314 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो पिछले सप्ताह की संख्या से करीब आधे थे। करीब 50 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 1000 से अधिक बताई गई थी। बड़े सुरक्षा इंतजामों ने 17 अक्टूबर को कई शहरों में हुई लूटपाट और तोड़फोड़ जैसी स्थिति दोहराने से रोकने में मदद की। फिर भी यूनियनों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। देशव्यापी हड़ताल अब वेतन, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं के सवालों पर सरकार के सामने दबाव बढ़ाने की अगली बड़ी कोशिश होगी। अगली तारीखें 31 अक्टूबर और 5 नवंबर तय की गई हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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