भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों के हितों की रक्षा
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते से किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे
भारत अमेरिका व्यापार समझौता
दिल्ली। भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में देश के किसानों या किसी भी अन्य हितधारक के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समझौते के अंतिम रूप लेने के बाद देशवासियों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। इस बयान से उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारी छूट मिलने से स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापार समझौते की वर्तमान स्थिति
नई दिल्ली तथा वाशिंगटन के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। दोनों देश आपसी मतभेदों और बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इस प्रक्रिया के बीच कुछ भारतीय किसानों की तरफ से तीखी आलोचना भी सामने आई है। किसानों का एक वर्ग आशंका जता रहा है कि इस समझौते को जल्दबाजी में तैयार किया गया है जिसके तहत अमेरिकी कृषि सामानों को भारतीय बाजारों में आसान पहुंच मिल जाएगी। इसी वजह से देश भर के विभिन्न किसान संगठन इस पूरे मामले पर सरकार से अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग लगातार उठा रहे हैं।
किसानों के विरोध प्रदर्शन की योजना
अनेक किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने इस समझौते के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि इस प्रकार के समझौतों से मक्का, बादाम, अखरोट, सेब और सोयाबीन तेल जैसे उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क समाप्त हो सकता है। इससे रियायती दरों पर अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में पहुंचेंगे और घरेलू स्तर पर कीमतें गिर सकती हैं, जिससे ग्रामीण आय पर विपरीत असर पड़ेगा। इस बात से नाराज किसान संघ ने नवंबर के महीने में इस समझौते के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है ताकि इस समझौते को वापस लिया जा सके।
केंद्रीय मंत्री का आश्वस्त करने वाला बयान
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इन सभी आशंकाओं और आलोचनाओं पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जब समझौते के विस्तृत विवरण सामने आएंगे तो पूरा देश जश्न मनाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में एक भी संवेदनशील हित को नजरअंदाज नहीं किया गया है। भारत और अमेरिका ने इसी साल फरवरी के महीने में इस समझौते के मूल ढांचे की रूपरेखा पेश की थी, जिससे ज्यादातर भारतीय सामानों पर अमेरिकी शुल्कों में राहत मिली थी। सरकार का दावा है कि इस समझौते से देश के निर्यातकों और कुल अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बढ़त और लाभ हासिल होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते तथा किसानों के विरोध से जुड़े आंकड़े और बयान उपलब्ध आधिकारिक बयानों पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।