दिल्ली में खतरनाक वायु गुणवत्ता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
दिल्ली में खतरनाक वायु गुणवत्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली पर ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल की अनुमति दी है जिससे प्रदूषण पर चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली में खतरनाक वायु गुणवत्ता
दिल्ली में खतरनाक वायु गुणवत्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में पटाखों पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दीवाली के जश्न के दौरान लोग निर्धारित समय के भीतर ग्रीन क्रैकर्स का उपयोग कर सकेंगे। इस निर्णय से शहर की आबोहवा और पर्यावरण प्रेमियों के बीच बहस छिड़ गई है क्योंकि सर्दियों के मौसम में यहाँ जहरीली हवा का प्रकोप पहले से ही काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है।
न्यायालय के आदेश और समय सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि ग्रीन क्रैकर्स का इस्तेमाल केवल सात और आठ नवंबर को यानी शनिवार और रविवार को तय समय सुबह छह से सात बजे और रात आठ से दस बजे के बीच ही किया जा सकेगा। इसके अलावा अस्पतालों, स्कूलों, वृद्धাশ्रमो तथा अधिसूचित शांत क्षेत्रों के पास किसी भी प्रकार के पटाखे चलाने की सख्त मनाही होगी। दीवाली समाप्त होने के तुरंत बाद नौ नवंबर से यह प्रतिबंध फिर से प्रभावी हो जाएगा।
इस बीच दिल्ली में खतरनाक वायु गुणवत्ता का स्तर इतना अधिक हो गया था कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने तुरंत प्रभाव से ग्रेप या ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण के प्रतिबंधों को पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लागू कर दिया है। आयोग का कहना है कि प्रतिकूल मौसम और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण यह कदम उठाना बेहद आवश्यक था।
आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की हवा में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक अक्टूबर के बाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल की अनुमति मिलने से आने वाले दिनों में चुनौतियां और अधिक बढ़ सकती हैं। प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक प्रभावों के लिए प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।