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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 15 May 2026 · 10:54 AM

ईंधन बचत के लिए आईटी कंपनियां आगे: 70 प्रतिशत स्टाफ को वर्क-फ्रॉम-होम

70 प्रतिशत स्टाफ को वर्क-फ्रॉम-होम

गुजरात का सूरत शहर, जो अपनी औद्योगिक प्रगति के लिए वैश्विक स्तर पर विख्यात है, अब पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की बचत की दिशा में एक नई मिसाल पेश कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित में की गई 'ईंधन बचाओ' की अपील का असर यहां के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र पर व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। सूरत की कई प्रमुख आईटी कंपनियों ने प्रधानमंत्री के इस आह्वान को स्वीकार करते हुए अपनी कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इन कंपनियों ने न केवल अपने कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम करने का संकल्प लिया है, बल्कि ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए 'वर्क-फ्रॉम-होम' (WFH) जैसी नीतियों को बड़े पैमाने पर लागू करना शुरू कर दिया है। यह पहल दर्शाती है कि कैसे कॉर्पोरेट जगत राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कॉर्पोरेट जगत की नई कार्यनीति: बिज़ इनसाइट्स का उदाहरण
सूरत स्थित प्रमुख आईटी फर्म 'बिज़ इनसाइट्स' (Biz Insights) इस अभियान का एक अग्रणी चेहरा बनकर उभरी है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कुणाल शाह ने प्रधानमंत्री की अपील के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा है कि वे इस पहल को सर्वोत्तम संभव तरीके से लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। शाह के अनुसार, पहले कंपनी का शत-प्रतिशत स्टाफ प्रतिदिन कार्यालय आता था, जिससे न केवल ट्रैफिक पर दबाव बढ़ता था, बल्कि ईंधन की खपत भी अधिक होती थी।

वर्तमान में, कंपनी ने अपनी नीतियों में लचीलापन लाते हुए लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे दी है। कार्यालय में अब केवल उन्हीं टीम सदस्यों को बुलाया जा रहा है जो अत्यंत महत्वपूर्ण (Critical) प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं या जिनकी समय सीमा (Deadlines) बहुत करीब है। शेष कार्य डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन सहयोग उपकरणों के जरिए कुशलतापूर्वक संपन्न किए जा रहे हैं। कुणाल शाह का मानना है कि इस कदम से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि कर्मचारियों की उत्पादकता और उनके कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) में भी सुधार होगा।

कर्मचारियों का योगदान और व्यक्तिगत प्रयास
इस बदलाव का असर केवल कंपनी की नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी कर्मचारी ऊर्जा बचत के प्रति जागरूक हुए हैं। सूरत के आईटी क्षेत्र में कार्यरत एक कर्मचारी ने अपनी दिनचर्या में आए बदलावों को साझा करते हुए बताया कि वर्क-फ्रॉम-होम का विकल्प मिलने से उन्हें और उनके परिवार को काफी सुविधा हुई है। उन्होंने बताया कि जिन दिनों ऑफिस जाना अनिवार्य होता है, उस समय भी वे ईंधन बचाने के लिए नवीन तरीके अपना रहे हैं।

कर्मचारी ने बताया कि उनके परिवार में अब परिवहन को लेकर विशेष चर्चा होती है। उन्होंने निर्णय लिया है कि वे ऑफिस जाने के लिए अब अलग से अपने निजी वाहन का उपयोग करने के बजाय अपने पिता या भाई के साथ वाहन साझा (Vehicle Sharing) करते हैं। इस प्रकार की 'पूलिंग' न केवल ईंधन बचाती है, बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करके प्रदूषण नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध हो रही है। यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो प्रधानमंत्री की अपील को एक जन-आंदोलन में बदलने की क्षमता रखता है।

दूरगामी प्रभाव और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा
सूरत की आईटी फर्मों द्वारा उठाये गए ये कदम केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि भविष्य की स्थायी कार्य संस्कृति की ओर एक संकेत हैं। डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती के कारण अब भौतिक रूप से कार्यालय उपस्थित होना अनिवार्य नहीं रह गया है। ईंधन की बचत से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य क्षेत्रों की कंपनियां भी सूरत के इस मॉडल को अपनाती हैं, तो शहरी क्षेत्रों में यातायात की भीड़, ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा, कम वाहन चलने से सड़कों पर होने वाली टूट-फूट और रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। सूरत की यह 'ग्रीन आईटी' पहल वर्तमान में अन्य शहरों और उद्योगों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर रही है।

निष्कर्ष: राष्ट्रीय अपील का सामूहिक परिणाम
प्रधानमंत्री मोदी की एक छोटी सी अपील ने सूरत के व्यावसायिक ढांचे में जो सकारात्मक हलचल पैदा की है, वह सामूहिक प्रयास की शक्ति को प्रमाणित करती है। आईटी सेक्टर ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय चेतना के समन्वय से जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। वर्क-फ्रॉम-होम केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि अब ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक रणनीतिक हथियार बन गया है। सूरत का यह डिजिटल परिवर्तन आने वाले समय में एक स्वच्छ और अधिक ऊर्जा-कुशल भारत के निर्माण की नींव रखेगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट वर्तमान में उपलब्ध समाचार सूचनाओं और आधिकारिक बयानों के विश्लेषण पर आधारित है। लेख में उल्लिखित नीतियां और निर्णय संबंधित कंपनियों के अपने विवेक पर आधारित हैं। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी नीतिगत बदलाव की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 15, 2026: 10:54 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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