राजस्थान की राजधानी जयपुर में हाल ही में संपन्न हुई 5वीं हिंद इंडिया ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2026 में बीकानेर के उभरते सितारे भाव्यांश मोदी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। श्री संघ शक्ति इंडोर हॉल में 2 और 3 मई 2026 को आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाव्यांश ने अंडर-31 किलोग्राम भार वर्ग की फ्रेशर श्रेणी (8-12 वर्ष) में हिस्सा लिया था। अपने फुर्तीले दांव-पेच और सटीक प्रहारों के दम पर उन्होंने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। आर्यन मार्शल आर्ट्स एकेडमी द्वारा आयोजित इस चैंपियनशिप में जीत दर्ज कर भाव्यांश ने न केवल पदक जीता, बल्कि आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अपना स्थान भी पक्का कर लिया है।
भाव्यांश की इस सफलता की कहानी घर की दहलीज से ही शुरू होती है। उनके घर में मार्शल आर्ट्स की नींव उनकी बड़ी बहन ने रखी थी। घर के सदस्यों के बीच चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी बहन खेल-खेल में भाव्यांश को लात मारकर अभ्यास की शुरुआत करती थी, जिसे आज वह बड़े गर्व के साथ साझा करती हैं। बहन को इस बात की खुशी है कि उनके द्वारा शुरू की गई ताइक्वांडो की यह लहर आज उनके भाई को स्वर्ण पदक तक ले आई है। हालांकि बहन वर्तमान में टेबल टेनिस में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और हाल ही में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, लेकिन भाई की उपलब्धि ने पूरे परिवार की खुशियों को दोगुना कर दिया है।
भाव्यांश मोदी वर्तमान में श्री जैन पब्लिक स्कूल, गंगाशहर (बीकानेर) में कक्षा 5 के छात्र हैं। अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय वे अपने माता-पिता और अपने कोच अनूप सर को देते हैं। भाव्यांश के पिता बजरंग मोदी ने गर्व के साथ बताया कि उन्हें अपने बेटे की मेहनत और लगन पर नाज है। उनका मानना है कि बेटा जिस भी क्षेत्र में जाए, बस अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से अच्छा प्रदर्शन करे। घर में 'लड्डू गोपाल' के नाम से पुकारे जाने वाले भाव्यांश अपनी पढ़ाई में भी उतने ही अव्वल हैं जितने खेल के मैदान में। उनकी माता ने बताया कि जब भाव्यांश गोल्ड मेडल लेकर घर लौटा, तो पूरे कुनबे यानी दादा-दादी और नाना-नानी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
भाव्यांश की जीत ने खत्री मोदी समाज को गौरवान्वित किया है। समाज के लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर के मंच पर स्वर्ण पदक जीतना एक बड़ी मिसाल है। भाव्यांश की बड़ी बहन को भी समाज द्वारा पूर्व में सम्मानित किया जा चुका है, और अब भाई की इस उपलब्धि ने परिवार की खेल विरासत को और ऊंचा कर दिया है। 9 वर्ष की आयु में इस स्तर का आत्मविश्वास और अनुशासन भाव्यांश को अन्य बच्चों से अलग बनाता है। स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने भी अपने छात्र की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
गोल्ड मेडल जीतने के बाद भाव्यांश का अगला लक्ष्य राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता है। उनके कोच अनूप सर के मार्गदर्शन में उन्होंने अभी से अभ्यास तेज कर दिया है। भाव्यांश की तकनीक और खेल के प्रति उनकी समझ को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। बीकानेर जैसे शहर से निकलकर जयपुर के बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ना यह दर्शाता है कि यदि सही मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग मिले, तो प्रतिभा किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है। पूरा गंगाशहर क्षेत्र आज अपने इस नन्हे चैंपियन की जीत का जश्न मना रहा है।
यह रिपोर्ट प्राप्त तथ्यों, पारिवारिक साक्षात्कारों और खेल प्रमाण पत्र की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इस समाचार का उद्देश्य केवल सूचना साझा करना और खिलाड़ी का उत्साहवर्धन करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी की सत्यता के आधार पर किसी भी प्रकार के कानूनी दावों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि आधिकारिक परिणामों के लिए आयोजक संस्था के रिकॉर्ड का संदर्भ लें।
Author:अजय त्यागी
May 15, 2026: 4:19 PM
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