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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 16 May 2026 · 5:06 PM

बीकानेर में पत्रकारिता के संकट पर परिसंवाद: जुटे देश के नामचीन पत्रकार 

आनंद निकेतन में आयोजित कला-सृजनमाला

राजस्थान के सांस्कृतिक शहर बीकानेर के स्थानीय आनंद निकेतन परिसर में प्रख्यात लोककला मर्मज्ञ डॉ. श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर एक विशेष वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, परंपरा, बीकानेर, प्रज्ञा परिवृत और उरमूल सीमांत समिति, बज्जू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में साहित्य, कला और पत्रकारिता जगत के प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि कीर्तिशेष डॉ. श्रीलाल मोहता की पावन स्मृति में प्रतिवर्ष इस विशेष तिथि को कला-सृजनमाला के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक उन्नयन के रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन बेहद निष्ठा के साथ किया जाता है। इस वर्ष इस मंच के माध्यम से समाज और लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण अंग यानी पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप और उस पर मंडराते विविध संकटों को लेकर एक बेहद गंभीर परिसंवाद का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के वरिष्ठ चिंतकों ने अपने विचार रखे।

पत्रकारिता के मूल्यों और सिद्धांतों से दूरी ही संकट की मुख्य वजह

इस वैचारिक परिसंवाद में मुख्य वक्ता और अध्यक्ष के रूप में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजीव हर्ष ने वर्तमान दौर की मीडिया कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में वर्तमान पत्रकारिता की आंतरिक और बाहरी विवशताओं को बहुत गहराई से रेखांकित किया। राजीव हर्ष ने साफ तौर पर कहा कि जब कोई मीडियाकर्मी स्वयं अपने नैतिक मूल्य और सिद्धांत निर्धारित करता है, तब उसकी लेखनी को व्यावसायिक ताकतों द्वारा खरीदना या किसी भी प्रकार से मैनेज करना पूरी तरह से नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि समाचार पत्रों ने अपने मूलभूत आदर्शों से दूरी बना ली है और उन पर बाजारवाद का गहरा दबाव साफ दिखाई देता है। उनके अनुसार, आज के दौर में सबसे बड़ा संकट सच्ची और जनहित की खबरों को दबाना है। उन्होंने राजनीतिक झुकाव, अत्यधिक महत्वाकांक्षा, प्रायोजित समाचारों की बाढ़ और पत्रकारों के आर्थिक स्वावलंबन की कमी को इस गिरावट का मुख्य कारण बताया।

मिशनरी भावना की कमी और विश्वसनीयता का गिरता वैश्विक स्तर

समारोह में सान्निध्य वक्तव्य देते हुए बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. ओम कुवेरा ने मीडिया जगत के पुराने दौर को याद किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सूचना के इस माध्यम को हमेशा एक सामाजिक मिशन के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि इसे विशुद्ध व्यवसाय या धन कमाने का कोई पेशा बनाना चाहिए। इसी क्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. ब्रजरतन जोशी ने कहा कि आज मीडिया के सामने एक दोहरा और बेहद द्वंद्वात्मक संकट खड़ा हो गया है। आज के सूचना तंत्र में वास्तविक तथ्यों और जमीनी सच्चाइयों के ऊपर मानवीय भावनाएं और बाजारवाद की व्यावसायिक ताकतें अधिक हावी होती जा रही हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न वैश्विक सर्वेक्षणों में भारतीय मीडिया और वैश्विक समाचार तंत्र की विश्वसनीयता का स्तर काफी नीचे बताया जा रहा है, जो चिंताजनक है। इसलिए हमें लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर मंडरा रहे काले बादलों को हटाने के लिए सार्थक आत्ममंथन करना ही होगा।

सोशल मीडिया का खतरा और मीडिया क्लर्क बनते जा रहे संवाददाता

खुले सत्र के दौरान शहर के तमाम प्रबुद्ध पत्रकारों और सृजनकर्मियों ने इस विषय पर अपनी बेबाक टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। वरिष्ठ लेखक मधु आचार्य ने कहा कि आज की सूचना प्रणाली सत्य की खोज करने के बजाय स्वयं सत्य की मंडी में तब्दील होती जा रही है। वहीं अजय जोशी ने प्रिंट मीडिया के सामने खड़े तकनीकी खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक और आधी-अधूरी खबरें इस पेशे के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं। दीपचंद सांखला ने वर्तमान स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अब वास्तविक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के दर्शन दुर्लभ हो चुके हैं और आज के दौर के संवाददाता केवल मीडिया क्लर्क की भूमिका में सिमट कर रह गए हैं। अनुराग हर्ष का मानना था कि किसी भी खबर की बौद्धिक क्षमता को परखने के बजाय अब उसका आकलन विशुद्ध रूप से आर्थिक और व्यावसायिक फायदों को ध्यान में रखकर किया जाने लगा है।

तकनीकी उदासीनता और जान का जोखिम उठाकर सच्ची रिपोर्टिंग

बहस को आगे बढ़ाते हुए राजेंद्र जोशी ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों पर आने वाले व्यक्तिगत संकटों और पूरी पत्रकारिता विधा पर आने वाले वैचारिक संकटों को दो अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। सुमित शर्मा ने मैदानी हकीकत बयां करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सही और खोजी खबरें निकालने के लिए संवाददाताओं को अक्सर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। आनंद आचार्य ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया कि हमारी स्थानीय पत्रकारिता में आधुनिक तकनीकी संसाधनों को अपनाने के प्रति एक अजीब सी उदासीनता व्याप्त है। श्याम मारू ने दुख जताया कि आज खबरों के छपने के बाद समाज पर होने वाले उसके सकारात्मक प्रभावों के प्रति कोई भी गंभीर नजर नहीं आता। श्याम नारायण रंगा ने पेड न्यूज की विभीषिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रायोजित समाचार भविष्य के प्रामाणिक इतिहास को भी गलत तरीके से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन में ओम प्रकाश सुथार और मुकेश व्यास सहित संस्था के सभी कार्यकर्ताओं की सराहनीय भूमिका रही।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समसामयिक वैचारिक रिपोर्ट बीकानेर के आनंद निकेतन में आयोजित कला-सृजनमाला परिसंवाद में, विभिन्न प्रबुद्ध वक्ताओं, लेखकों एवं वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा व्यक्त किए गए उनके व्यक्तिगत अनुभवों, बयानों और स्थानीय समाचार एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रामाणिक विधिक तथ्यों पर पूरी तरह आधारित है। इस संगोष्ठी में व्यक्त किए गए विचार वक्ताओं के निजी और स्वतंत्र अकादमिक निष्कर्ष हैं। इस परिसंवाद से जुड़े किसी भी प्रकार के वैधानिक संदर्भ, संस्थागत प्रस्तावों या आयोजकों के आधिकारिक निर्णयों के लिए संबंधित आयोजन समितियों द्वारा जारी मूल विधिक प्रेस विज्ञप्ति को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में बौद्धिक चर्चाओं और सामाजिक विकास की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 16, 2026: 5:06 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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