उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित लखनऊ में जिला अदालत परिसर के बाहर रविवार सुबह उस समय भारी तनाव फैल गया, जब नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने पहुँची। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के सख्त आदेश के बाद जिला अदालत और पुराने हाईकोर्ट परिसर के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर अवैध रूप से बनाए गए चैंबरों और दुकानों को ढहाने की यह बड़ी कार्रवाई की जा रही थी। जैसे ही नगर निगम के बुलडोजर ने अवैध ढांचों को गिराना शुरू किया, वैसे ही वहां हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय वकील इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
अतिक्रमण हटाने की इस प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच देखते ही देखते विवाद बेहद उग्र हो गया। वकीलों का आरोप था कि नगर निगम द्वारा बिना किसी पूर्व नोटिस या पर्याप्त सूचना के यह ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह गलत है। स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब प्रदर्शनकारी वकीलों के एक उग्र गुट ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और नगर निगम के वाहनों पर अचानक पथराव शुरू कर दिया। पथराव के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई वाहनों के शीशे टूट गए।
अधिवक्ताओं द्वारा किए गए इस औचक पथराव के जवाब में स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने हंगामा कर रहे और पत्थरबाजी कर रहे वकीलों को खदेड़ने के लिए कड़ा लाठीचार्ज कर दिया।
कैसरबाग इलाके के मौजूद पुलिस अधिकारियों ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, “अदालत के आदेश पर जिला कोर्ट परिसर के बाहर कुल दो सौ चालीस अवैध निर्माणों और चैंबरों को हटाने की कार्रवाई चल रही थी, लेकिन कुछ वकीलों के उग्र प्रदर्शन और पथराव के बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया है।”
इस हिंसक टकराव के बाद कैसरबाग और जिला अदालत के आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। लखनऊ पश्चिम के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कमलेश दीक्षित ने स्वयं मौके पर पहुँचकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। कानून और व्यवस्था की विकट स्थिति को भांपते हुए घटना स्थल पर कई थानों की अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स, पीएसी (PAC) की टुकड़ियों और दंगा नियंत्रण वाहनों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं, लेकिन वकीलों के तीखे तेवरों को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
अधिवक्ताओं के भारी विरोध और तीखी झड़प के बावजूद नगर निगम की टीम ने पुलिस सुरक्षा के साए में अपनी बुलडोजर कार्रवाई को रुकने नहीं दिया। प्रशासन का साफ कहना है कि सार्वजनिक रास्तों पर बिना किसी मानक के बनाए गए इन दो सौ चालीस अवैध ढांचों के कारण यहाँ आने वाले आम वादकारियों, राहगीरों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
उच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कार्रवाई पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि, “अधिवक्ताओं के लिए वैध चैंबरों के आवंटन की प्रक्रिया अलग से विचाराधीन है, परंतु इसकी आड़ में किसी को भी मुख्य मार्गों पर अवैध अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती है।” समाचार लिखे जाने तक इलाके में सुरक्षा बल मार्च कर रहे हैं।[1]
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Author:अजय त्यागी
May 17, 2026: 1:37 PM
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