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Rex TV India
Latest News स्वास्थ्य Digital Newsletter 18 May 2026 · 8:37 PM

आंध्र प्रदेश के पेदाबायलु में प्रसव पीड़ा के बीच पैदल चली महिला

एम्बुलेंस की इन्तेजार में पीडिता

देश में बुनियादी ढांचे के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के तमाम बड़े दावों के बीच सुदूर ग्रामीण और जनजातीय इलाकों से आज भी बेहद झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आती हैं। आंध्र प्रदेश के पेदाबायलु में स्थित अल्लूरी सीताराम राजू (एएसआर) जिले के एक सुदूरवर्ती आदिवासी इलाके से प्रशासनिक लापरवाही और मानवीय लाचारी की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ एक गर्भवती जनजातीय महिला को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू होने के बाद मुख्य सड़क और अस्पताल तक पहुँचने के लिए उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर करीब सात किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बोंगाराम पंचायत का दर्द

यह पूरी हृदयविदारक घटना आंध्र प्रदेश के पेदाबायलु मंडल के अंतर्गत आने वाली बोंगाराम पंचायत के वेदुरुगोयी गांव की बताई जा रही है।

भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम और कटी हुई इस छोटी सी जनजातीय बस्ती में लगभग 30 परिवार निवास करते हैं। आजादी के इतने दशकों बाद भी यह गांव आज तक एक अदद पक्की या मोटर चलने योग्य सड़क से विधिक रूप से नहीं जुड़ पाया है। सड़क संपर्क के इस गंभीर अभाव के कारण यहाँ के गरीब और सीधे-सादे ग्रामीणों को अपनी सबसे बुनियादी जरूरतों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए भी आए दिन जीवन और मृत्यु की कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है।

प्रसव पीड़ा में सफर

आंध्र प्रदेश के पेदाबायलु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव की रहने वाली चिक्कुडु सीमाली नाम की एक आदिवासी महिला को बीते रविवार को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी।

गांव में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक या निजी परिवहन साधन उपलब्ध न होने के कारण परिवार के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। अंततः कोई दूसरा रास्ता न देख, पीड़ित महिला ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक स्थानीय आशा कार्यकर्ता (ASHA Worker) और अपने परिवार के सदस्यों की मदद से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित वांचुरब गांव की तरफ पैदल ही अत्यंत कष्टदायक यात्रा शुरू की।[1]

एम्बुलेंस की कड़ाके की देरी

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने जैसे ही महिला की हालत देखी, तुरंत ही आपातकालीन '108' एम्बुलेंस सेवा को इस विधिक मेडिकल इमरजेंसी के बारे में सूचित कर दिया था।

हालांकि, ग्रामीणों द्वारा बार-बार फोन किए जाने के बावजूद एम्बुलेंस सेवा समय पर गांव के नजदीकी पॉइंट तक पहुँचने में पूरी तरह नाकाम रही। चिक्कुडु सीमाली ने असहनीय प्रसव पीड़ा को सहन करते हुए किसी तरह पैदल चलकर वांचुरब गांव का मुख्य छोर तय किया। लेकिन वहां पहुँचने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं और उन्हें दर्द से तड़पते हुए करीब एक घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ा।

अस्पताल में भर्ती

जब आपातकालीन वाहन आखिरकार मौके पर पहुँचा, तब जाकर गंभीर हालत में महिला को नजदीकी मंचिंगीपुट्टू के सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

इस घटना ने स्थानीय जनजातीय निवासियों के भीतर प्रशासन के प्रति गहरे गुस्से और चिंता को भड़का दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से कहना है कि आदिवासी बेल्ट में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य नेटवर्क की लगातार की जा रही घोर अनदेखी के कारण इस तरह की जानलेवा और दर्दनाक अग्निपरीक्षाएं अब यहाँ के रोजमर्रा के जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन चुकी हैं।

दस किलोमीटर की दूरी

वेदुरुगोयी के स्थानीय निवासियों ने अपना दुखड़ा रोते हुए मीडिया को बताया कि चलने योग्य पक्की सड़कों की अनुपस्थिति उनके जीवन के हर पहलू को बुरी तरह प्रभावित करती है।

आपातकालीन स्थिति में अस्पतालों तक पहुँचना हो, राशन की दुकानों से आवश्यक वस्तुएं खरीदनी हों, या छोटे बच्चों को स्कूल भेजना हो, ग्रामीणों को हर छोटे-बड़े काम के लिए पथरीले रास्तों से होकर कम से कम 10 किलोमीटर पैदल चलना ही पड़ता है। पहाड़ी ढलानों पर बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी अधिक जानलेवा हो जाती है, जिससे पूरा इलाका बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है।

सरकार से गुहार

चिकित्सीय आपातकाल के समय गांव के पुरुष और महिलाएं खुद को पूरी तरह असहाय और भगवान भरोसे पाते हैं।

एक स्थानीय ग्रामीण ने भारी मन से इस पूरी प्रशासनिक उपेक्षा पर बात करते हुए कहा कि, “चिकित्सीय आपात स्थिति में भी हमें असहाय छोड़ दिया जाता है; इस अव्यवस्था में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों को सबसे ज्यादा कष्ट उठाना पड़ता है।” आंध्र प्रदेश के पेदाबायलु में घटी इस हालिया घटना ने एक बार फिर उन सुदूर जनजातीय गांवों की गंभीर जमीनी हकीकत को उजागर किया है, जहाँ आज भी विकास की किरण नहीं पहुँची है और बुनियादी ढांचे की कमी लगातार इंसानी जिंदगियों को खतरे में डाल रही है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के पेदाबायलु मंडल में घटी वास्तविक घटना, स्थानीय ग्रामीणों के साक्षात्कारों और एम्बुलेंस सेवाओं की विलंबावधि के प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सड़क अवसंरचना की नीतियां पूरी तरह से राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन के विधिक क्षेत्राधिकार के अधीन होती हैं। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट की जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण या निष्कर्ष के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 18, 2026: 8:37 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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