बांद्रा स्टेशन के पास वेस्टर्न रेलवे की एक बहुत बड़ी और व्यापक कार्रवाई मंगलवार सुबह से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए कड़े और स्पष्ट निर्देशों का अनुपालन करते हुए रेलवे प्रशासन ने रेल पटरियों के आस-पास की सरकारी जमीन से सभी अवैध निर्माणों और झुग्गियों को ध्वस्त करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। रेल सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय मुंबई पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे के बीच इस बड़े अभियान को अंजाम दिया जा रहा है।[1]
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह विशाल अतिक्रमण विरोधी अभियान अगले चार दिनों तक लगातार बांद्रा स्टेशन के पास वेस्टर्न रेलवे परिसर में बिना रुके सक्रिय रूप से जारी रहने वाला है।
इस सघन अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे ट्रैक के बेहद नजदीक बसी अवैध बस्तियों को पूरी तरह नेस्तनाबूत करना है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, जिसके लिए कई भारी बुलडोजर और पोकलेन मशीनें मौके पर तैनात की गई हैं।
रेलवे के वरिष्ठ परिचालन अधिकारियों ने बताया कि बांद्रा के इस व्यस्त रेल खंड पर लंबे समय से अवैध कब्जा एक गंभीर समस्या बना हुआ था।
इस अनधिकृत मलबे की वजह से रेलवे परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा के सामने हर वक्त गंभीर चुनौतियां खड़ी रहती थीं। इन रिहायशी झुग्गियों में रहने वाले लोग अक्सर अनधिकृत रूप से रेलवे ट्रैक को पार करते थे, जिससे न केवल उनकी जान को चौबीसों घंटे खतरा बना रहता था, बल्कि लोकल ट्रेनों की समयबद्धता पर भी विपरीत असर पड़ता था।
पटरियों के पास रहने वाले लोगों द्वारा रेल संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और पटरियों पर कचरा फेंकने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही थीं।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे मामले की गंभीरता पर बात करते हुए मीडिया के समक्ष स्पष्ट कहा कि, “इस अनधिकृत भीड़भाड़ और अतिक्रमण के कारण ट्रेन परिचालन में बार-बार गंभीर व्यवधान उत्पन्न होता था, साथ ही मुंबई उपनगरीय नेटवर्क की महत्वपूर्ण ढांचागत विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में बहुत बड़ी बाधा आ रही थी।”
यह पूरा रेल खंड मुंबई शहर की परिवहन क्षमता और भविष्य के रेल आधुनिकीकरण के लिहाज से परिचालन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पश्चिम रेलवे ने मुंबई सेंट्रल से बोरिवली के बीच छठी लाइन बिछाने की एक बड़ी ढांचागत योजना तैयार की है, जिसके काम का एक बड़ा हिस्सा इसी बांद्रा टर्मिनस और स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इस रेलवे भूमि के पूरी तरह खाली होने के बाद ही नई पटरियां बिछाने का काम सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस कीमती भूमि का पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त होना रेल सुरक्षा, परिचालन लचीलेपन और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए अत्यंत अनिवार्य है।
जब यहाँ छठी रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, तब मुंबई के लाखों दैनिक रेल यात्रियों के लिए अतिरिक्त लोकल ट्रेन सेवाएं और कई नई लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियां शुरू की जा सकेंगी। इससे बांद्रा और खार स्टेशनों के बीच रहने वाले यात्रियों को रोज़मर्रा की भीड़ से बड़ी राहत मिलेगी।
उठ रहे विवादों के बीच बांद्रा स्टेशन के पास वेस्टर्न रेलवे की टीम ने कोर्ट के आदेशों के तहत अपनी इस बड़ी कार्रवाई को पूरी मजबूती से आगे बढ़ाया है।
माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनहित और रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए अवैध कब्जाधारियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। अदालत ने रेलवे प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए तुरंत प्रभाव से अपनी जमीन को खाली कराने और सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) का निर्माण करने के कड़े निर्देश जारी किए थे।
विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए रेलवे ने प्रभावित लोगों को अपना सामान हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी कर दिया था।
यही वजह है कि मंगलवार को शुरू हुई इस तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विरोध प्रदर्शन का सामना नहीं करना पड़ा है और प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही है। अंततः, बांद्रा स्टेशन के पास वेस्टर्न रेलवे की इस निर्णायक कार्रवाई से मुंबई के पूरे रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है।
यह नागरिक सुरक्षा और रेल यातायात से जुड़ी समाचार रिपोर्ट माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों, पश्चिम रेलवे (Western Railway) के आधिकारिक। प्रेस बयानों और ग्राउंड जीरो पर तैनात स्थानीय संवाददाताओं द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। रेलवे भूमि के मालिकाना हक, मुआवजा दावों और अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक समय-सारणी की अंतिम पुष्टि पूरी तरह से रेल मंत्रालय और संबंधित कानूनी प्राधिकरणों के नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।
Author:अजय त्यागी
May 19, 2026: 2:10 PM
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