क्यूबा को नाकाम देश करार देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वहां की मौजूदा स्थिति पर अपनी गहरी चिंताएं जाहिर की हैं। व्हाइट हाउस और फ्लोरिडा में दिए गए बयानों से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन अब इस देश के प्रति अपनी नीति को और अधिक कठोर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि वहां के वर्तमान हालात राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम हैं।[1]
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए वहां की बदहाली का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि "वह एक नाकाम देश है और यह बात हर कोई जानता है।" वहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जहां बिजली, पैसे और भोजन की भारी किल्लत है। ट्रंप का मानना है कि फ्लोरिडा में बसे क्यूबा मूल के अमेरिकी नागरिक अपनी मातृभूमि में निवेश करके उसे पुनर्जीवित करने के लिए उत्सुक हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि पिछले पांच-छह दशकों में कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इस समस्या पर विचार किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकाल सका। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि "उन्हें लगता है कि इस समस्या को वे ही सुलझा पाएंगे।" उन्होंने मानवीय आधार पर वहां की जनता की मदद करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है, ताकि वहां के लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
Cuba a failing nation, US in Cuba on a humanitarian basis to help.
— News Arena India (@NewsArenaIndia) May 21, 2026
- US President Donald Trump pic.twitter.com/3phVfuyoA1
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत यात्रा से पूर्व मियामी में बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि "क्यूबा लगातार अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।" उन्होंने इस भौगोलिक वास्तविकता पर जोर दिया कि वह अमेरिकी तट से महज 90 मील दूर स्थित है। रुबियो ने आरोप लगाया कि वहां की सरकार अमेरिका के कट्टर दुश्मनों के प्रभाव में है और वहां रूस व चीन की एजेंसियां सक्रिय हैं।
रुबियो ने यह भी दावा किया कि वहां विदेशी हथियार प्रणालियां तैनात की गई हैं, जो सीधे तौर पर अमेरिकी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करती हैं। उन्होंने लैटिन अमेरिका में अस्थिरता फैलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह स्थिति अब और अधिक सहन नहीं की जाएगी। अमेरिका अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है, यह बात स्पष्ट है।
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने इस सुरक्षा खतरे को और अधिक विस्तार से समझाया। उन्होंने चेतावनी दी कि वह अमेरिका के दुश्मनों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन सकता है, जहां से ड्रोन हमले की आशंका बनी रहती है। मिलर ने कहा कि "अमेरिका का कोई भी दुश्मन क्यूबा से हमला करने वाले ड्रोन भेज सकता है," जो बहुत आसानी से अमेरिकी सीमाओं में प्रवेश कर सकते हैं।
यह चिंताजनक है कि इतने कम फासले पर दुश्मनों या आतंकवादियों का कोई भी अड्डा अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। रुबियो ने साफ किया कि मानवीय सहायता जरूर दी जाएगी, लेकिन वह सेना के बजाय केवल स्वतंत्र समूहों के माध्यम से ही वितरित की जाएगी। यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि सहायता सीधे उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी वास्तव में आवश्यकता है, न कि सत्ताधारी शासन को, जो क्यूबा को नाकाम देश बना रहा है।
क्यूबा को नाकाम देश मानने की अमेरिकी नीति में यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। वहां के शासन के प्रति अपनी सख्ती दिखाते हुए अमेरिका ने यह संदेश दिया है कि वह अपने पड़ोसी देशों में किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। यह दृष्टिकोण भविष्य में लैटिन अमेरिकी देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को पूरी तरह से और बहुत गहराई से बदल सकता है।
अतीत की विफलताओं को पीछे छोड़ते हुए ट्रंप प्रशासन अब एक नया अध्याय शुरू करने का प्रयास कर रहा है। चाहे वह कूटनीतिक दबाव हो या आर्थिक प्रतिबंधों का नया दौर, सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। इसे क्यूबा को नाकाम देश की श्रेणी में रखना इस बात का संकेत है कि अब अमेरिका वहां के शासन पर लगाम लगाने के लिए किसी भी हद तक जाने को पूरी तरह तैयार है।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित आधिकारिक अमेरिकी बयानों, रणनीतिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समाचार तथ्यों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रशासनिक विदेश नीति के क्रियान्वयन और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए आधिकारिक अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों की पुष्टि करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या होने वाले परिणामों के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
May 22, 2026: 11:59 AM
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