त्रिशूर शहर में शनिवार की सुबह मंदिर उत्सव के लिए लाए गए एक हाथी के अचानक उग्र हो जाने से शहर में हड़कंप मच गया। 'शिवम लक्ष्मी अय्यप्पन' नामक इस हाथी का हिंसक उत्पात करीब दो किलोमीटर क्षेत्र तक देखने को मिला, जिससे रिहायशी इलाकों और व्यस्त सड़कों पर लोग सहम गए। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ, लेकिन निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा है।
घटना सुबह लगभग 9:15 बजे उस समय शुरू हुई जब हाथी को नियमित स्नान कराकर वापस लाया जा रहा था। चेंबुक्कावु टाउन हॉल के पास अचानक शोर-शराबे और भीड़ के कारण हाथी उत्तेजित हो गया और उसने नियंत्रण खो दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, "हाथी अचानक आक्रामक हो गया और उसने पास खड़ी गाड़ियों, ऑटो-रिक्शा और मोटरसाइकिल को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद लगभग दो घंटे तक हाथी का हिंसक उत्पात दिखाई दिया।"
हाथी ने न केवल वाहनों को बल्कि आवासीय परिसरों की चारदीवारी, गेट और टिन की छतों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। चेंबुक्कावु पोस्ट ऑफिस परिसर में भी हाथी ने तोड़फोड़ की। इसके बाद हाथी चेरुर के गांधीनगर हाउसिंग कॉलोनी की तंग गलियों में घुस गया, जहाँ लगभग दो घंटे तक लोगों की सांसें अटकी रहीं। आवासीय इलाकों में हाथियों का इस तरह घुसना सुरक्षा तंत्र पर बड़े सवाल खड़ा करता है।[1]
स्थानीय निवासी महेश चेंबुक्कावु ने मीडिया को बताया कि "शुरुआत में हाथी शांत था, लेकिन भीड़ बढ़ने और शोर के कारण वह उत्तेजित हो गया।" भागते समय टिन की शीट और अन्य संरचनाओं के टकराने से हाथी को भी मामूली चोटें आई हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और विशेष हाथी दस्ता मौके पर पहुँच गया। अधिकारियों ने बताया कि कड़ी मशक्कत के बाद हाथी को जंजीरों से बांधकर शांत किया गया। तब कही जाकर इस हाथी का हिंसक उत्पात ख़त्म हुआ।
वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर और मुख्य वन संरक्षक को तुरंत राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए। त्रिशूर की मेयर नाजी जस्टिन ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि "स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है हाथी का हिंसक उत्पात थम चुका है। एम्बुलेंस सहित आपातकालीन सुविधाएं मौके पर तैनात कर दी गई थीं ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।"
हाथी के उग्र होने के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, हाथी का पिछला कोई हिंसक इतिहास नहीं रहा है। इस घटना के दौरान हाथी का हिंसक उत्पात जिस कार पर उतरा उसमे संगीता नामक महिला और एक बच्चा सवार थे, जिन्हें बाल-बाल बचा लिया गया। उन्हें कोई बड़ी चोट नहीं आई। जिला प्रशासन अब इस हाथी के उत्पात की घटना का विस्तृत मूल्यांकन कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
केरल में त्योहारों के दौरान हाथियों का उपयोग लंबे समय से बहस का विषय रहा है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने की मांग की है। हाथियों के लिए परिवहन के दौरान शोर-शराबे से बचने और कुशल महावतों की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि वे इस घटना से सबक लेंगे और भविष्य में हाथियों के प्रबंधन के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू करेंगे।
त्रिशूर जैसे घनी आबादी वाले शहर में हाथी का हिंसक उत्पात प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। हाथियों को त्योहारों के लिए शहर के बीच से ले जाना कितना जोखिम भरा हो सकता है, यह आज सबके सामने है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल हाथी को कड़ी निगरानी में रखा गया है और उसे पूर्ण स्वस्थ होने तक किसी भी आयोजन से दूर रखा जाएगा।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी स्थानीय पुलिस, वन विभाग और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस घटना के कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की विस्तृत जानकारी के लिए त्रिशूर प्रशासन के आधिकारिक बयानों का संदर्भ लें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।
An elephant went on a rampage in Thrissur on Saturday, causing damage to vehicles and houses and even flipping a car that had a woman inside. No one was fortunately injured.
— Hate Detector (@HateDetectors) May 23, 2026
The elephant, Shivalakshmi Ayyappan, turned violent when it was stopped near the South Gopuram entrance… pic.twitter.com/dJ4Ny16FuY
Author:अजय त्यागी
May 23, 2026: 7:39 PM
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