आगरा में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई के दौरान नकली दवाओं का नेटवर्क पकड़ा गया है। जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड के रुड़की स्थित एक अवैध फैक्ट्री में तैयार की गई दवाएं आगरा और आसपास के जिलों में धड़ल्ले से बेची जा रही थीं। औषधि विभाग की टीम ने 21 से 23 मई के बीच आगरा के कई ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये का अवैध स्टॉक बरामद किया है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये आरोपी बाजार से असली दवाओं के पैकेट खरीदकर उनकी फोटो अलीगढ़ में बैठे बिचौलिए को भेजते थे। इसके बाद, रुड़की की अवैध फैक्ट्री में हूबहू पैकेजिंग तैयार कर उसमें घटिया दवाएं भरकर बसों के जरिए आगरा पहुंचाया जाता था। यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से लगातार चल रहा था।[1]
लखनऊ से आई औषधि विभाग की टीम ने आगरा के फव्वारा दवा बाजार में 18 से अधिक एजेंसियों पर छापेमारी कर नकली दवाओं का नेटवर्क पकड़ा। "इस कार्रवाई में सरकारी अस्पतालों, ईएसआई और सैन्य अस्पतालों के लिए निर्धारित दवाएं भी भारी मात्रा में बरामद की गई हैं," अधिकारियों ने पुष्टि की। जब्त की गई दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है, जो सीधे तौर पर आम मरीजों के स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ था।
गोदामों से बड़ी संख्या में सैंपल दवाएं भी मिलीं, जिनका व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह वर्जित है। औषधि विभाग की 29 सदस्यीय टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली थाने में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस अब इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है।
कई नामी दवा कंपनियों ने विभाग को शिकायत की थी कि उनके ब्रांड्स की असली मांग कम हो रही है, जबकि बाजार में उनकी नकली प्रतियां बेची जा रही हैं। जायडस हेल्थकेयर लिमिटेड की शिकायत पर फव्वारा बाजार स्थित श्री मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा गया। वहां स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया, जिससे नकली दवाओं का नेटवर्क पकड़ा जा सका और जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार ने बताया कि फर्म के पास 13,160 स्ट्रिप दवाएं बिना किसी वैध खरीद बिल के मिलीं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गोल्डन पैलेस के बेसमेंट में एक अवैध गोदाम भी संचालित हो रहा था। बिना लाइसेंस के चल रहे इस गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। वहां से भी बड़ी मात्रा में संदिग्ध और अवैध दवाएं बरामद की गई हैं।
जांच में सामने आया कि दवाओं का भुगतान नकद और हवाला के जरिए होता था। आगरा के सुरेंद्र कुमार गुप्ता, अलीगढ़ के मयंक गुप्ता, रुड़की के अन्नू अरोड़ा और मुजफ्फरनगर के संयम अरोड़ा को एफआईआर में नामजद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, "आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले एक साल से इस अवैध नेटवर्क के माध्यम से धंधा चला रहे थे।"
पैसा अलीगढ़ या हाथरस मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पहुंचाया जाता था। बरामद दवाओं में 'ऑक्सलजिन-डीपी' टैबलेट की नकली प्रतियां प्रमुखता से शामिल हैं। आरोपियों के मोबाइल से मिली तस्वीरों और चैट ने इस बात की पुष्टि की है कि कैसे पैकेजिंग की बारीकियां रुड़की फैक्ट्री को भेजी जाती थीं। यह पूरा खेल लंबे समय से बिना किसी कानूनी बाधा के संचालित हो रहा था।
दो अन्य एफआईआर भी कोतवाली थाने में दर्ज की गई हैं। इसमें ज्योति ड्रग हाउस के मालिक नारायण दास हंसराजानी और उनके कर्मचारी पुनीत कटारा को नामजद किया गया है। इन पर सरकारी अस्पतालों के लिए आवंटित दवाओं को अवैध रूप से स्टोर करने का आरोप है। अधिकारियों का मानना है कि नकली दवाओं का नेटवर्क पकड़ा जाने से मरीजों की जान बचाई जा सकी है।
औषधि विभाग ने सभी दवा व्यापारियों को सख्त चेतावनी जारी की है कि वे अपनी इन्वेंट्री का रिकॉर्ड पारदर्शी रखें। विभाग का कहना है कि यह लड़ाई अभी शुरू हुई है और भविष्य में भी ऐसी औचक छापेमारी जारी रहेगी। आगरा के सहायक दवा आयुक्त अतुल उपाध्याय ने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी विभाग द्वारा प्राप्त प्राथमिक विवरणों और जांच रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह रिपोर्ट केवल जनहित में सूचना साझा करने के लिए तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में प्रस्तुत विवरण के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
May 25, 2026: 5:11 PM
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