WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
← Back to article
Rex TV India
Latest News स्वास्थ्य Digital Newsletter 25 May 2026 · 8:06 PM

हृदय रोग उपचार में बड़ी सफलता: पीबीएम में आईवीएल तकनीक का प्रयोग

ऑपरेशन करने वाली टीम

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल स्थित हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल ने चिकित्सा जगत में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहाँ वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पिंटू नाहटा और उनकी टीम ने एक बेहद जटिल हृदय रोग का उपचार कर मरीज को जीवनदान दिया है। यह सफलता आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती दक्षता और तकनीकी कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

मरीज मूलाराम को गंभीर हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ. नाहटा के नेतृत्व में जब उनकी एंजियोग्राफी की गई, तो हृदय की मुख्य धमनी यानी एलएडी में लंबा कैल्शिफाइड ब्लॉकेज पाया गया। "ऐसी स्थिति में सामान्य एंजियोप्लास्टी एवं स्टैंटिंग संभव नहीं थी," डॉ. नाहटा ने बताया कि कैल्शियम की अत्यधिक मात्रा के कारण स्टैंट डालना बेहद जोखिम भरा था।

तकनीक का चयन

सामान्य परिस्थितियों में ऐसे ब्लॉकेज के लिए रोटाब्लेटर मशीन का उपयोग किया जाता है, जिससे कैल्शियम को खुरच कर स्टैंट के लिए रास्ता बनाया जाता है। हालांकि, इस मरीज में हार्ट की पंपिंग मात्र 30 प्रतिशत थी, जिससे पारंपरिक रोटाब्लेटर तकनीक में जटिलताएं बढ़ने का खतरा काफी अधिक था। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने देश की अति आधुनिक आईवीएल (इंट्रा वस्कूलर लीथोट्रिपसी) तकनीक का उपयोग करने का साहसी निर्णय लिया।

इस तकनीक के उपयोग के बारे में बताते हुए डॉ. नाहटा ने कहा कि, "आईवीएल तकनीक का इस जटिल केस में पहली बार उपयोग किया गया है।" इस अत्याधुनिक बैलून तकनीक की मदद से कैल्शियम के लोड को कम करना और स्टैंट को सही स्थान पर पहुंचाना संभव हो पाया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण सामान्य ऑपरेशन के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

उपचार की प्रक्रिया

उपचार की शुरुआत ओसीटी इमेजिंग मशीन से की गई, जिससे धमनी के अंदर जमी कैल्शियम की सटीक स्थिति का पता चला। धमनी में चारों ओर कैल्शियम के कठोर नोड्यूल बने हुए थे, जो रक्त प्रवाह में बड़ी बाधा थे। इन पर आईवीएल बैलून ले जाकर सोनिक वेव के विकिरण का उपयोग किया गया, जिससे कैल्शियम के कठोर टुकड़े हो गए। यह पूरी प्रक्रिया आईवीएल तकनीक की सटीकता को प्रमाणित करती है।

कैल्शियम के टुकड़े होने के बाद स्टैंट को ब्लॉकेज वाली जगह पर आसानी से ले जाया गया और उसे फुलाकर धमनी को पूरी तरह से खोल दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप रक्त धमनियों में रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से शुरू हो गया। मरीज की रिकवरी संतोषजनक है और हार्ट पंपिंग में भी धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है। यह जटिल हृदय रोग का उपचार चिकित्सा टीम के धैर्य और नई तकनीक के सही तालमेल का परिणाम है।

टीम का योगदान

इस ऐतिहासिक आईवीएल तकनीक प्रोसीजर को सफल बनाने वाली कार्डियोलॉजी टीम में डॉ. पिंटू नाहटा, डॉ. दिनेश चौधरी, डॉ. सुनील बुडानिया, डॉ. रामगोपाल कुमावत, डॉ. राजवीर बेनीवाल और डॉ. नजमा शामिल थे। कैथ लैब की पूरी टीम का सहयोग भी सराहनीय रहा। इसमें कैथ लैब इंचार्ज राकेश सोलंकी, चंद्र कुमार आहूजा, पंकज तंवर के साथ-साथ नर्सिंग इंचार्ज ताहिरा बानो और सीताराम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह की तकनीकों का समावेश मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद जगाता है। हल्दीराम हार्ट अस्पताल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आधुनिक उपकरणों और कुशल विशेषज्ञों की बदौलत हृदय रोग उपचार के जटिल से जटिल मामलों को अब बीकानेर में ही सुलझाया जा सकता है। यह चिकित्सा व्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि है, जो भविष्य में कई अन्य रोगियों के जीवन को सुरक्षित बनाएगी।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी विश्वसनीय चिकित्सा सूत्रों और अस्पताल प्रशासन द्वारा साझा किए गए विवरणों पर आधारित है। चिकित्सा तकनीक और उपचार पद्धतियां समय के साथ परिवर्तन के अधीन हैं। अतः किसी भी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति या उपचार संबंधी अंतिम निर्णय लेने से पूर्व संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 25, 2026: 8:06 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
— End of Article —