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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 25 May 2026 · 9:40 PM

कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास

कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं का निरिक्षण

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। भीलवाड़ा जिले की कोटड़ी तहसील के गोविंदपुरा ग्राम में कृषि परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल ने हाल ही में गांव का दौरा किया और राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन का बारीकी से अवलोकन किया। उनका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रगतिशील किसानों के खेतों का भ्रमण किया। वहां किसानों द्वारा अपनाई गई ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक और संरक्षित खेती के परिणामों ने उन्हें काफी प्रभावित किया। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि, "राज्य सरकार की कृषि एवं उद्यानिकी योजनाएं कृषकों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं," जो कि आज के दौर में कृषि क्षेत्र के लिए बहुत आवश्यक है।

तकनीकी खेती के लाभ

किसान चांता देवी, धनराज माली एवं भंवर माली जैसे प्रगतिशील किसानों ने कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं का लाभ उठाकर मिर्ची, भिंडी और फूलगोभी जैसी फसलों की वैज्ञानिक खेती शुरू की है। इन किसानों ने बताया कि मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई से न केवल जल का अपव्यय रुका है, बल्कि उत्पादन लागत में भी भारी कमी आई है। आज वे प्रति बीघा एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

इन किसानों को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का भरपूर सहयोग मिला है। सिंचाई के लिए उन्होंने विद्युत कनेक्शन की जगह सोलर पंप संयंत्र को प्राथमिकता दी है, जिस पर विभाग द्वारा 75 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया गया है। यह न केवल ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि किसानों के लिए सिंचाई लागत को शून्य के बराबर ले आया है।

पोलीहाउस की सफलता

पोलीहाउस तकनीक ने किसानों की किस्मत बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। गोविंदपुरा में खीरे की संरक्षित खेती कर रहे किसानों ने बताया कि वे प्रति सीजन लगभग 10 लाख रुपये का उत्पादन ले रहे हैं, जिसमें से चार लाख रुपये की लागत घटाने के बाद भी उन्हें छह लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है। यह कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के माध्यम से प्राप्त होने वाला एक बड़ा आर्थिक संबल है।

प्रमुख शासन सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन तकनीकों का प्रचार-प्रसार और अधिक किया जाए। उन्होंने कहा कि, "सूक्ष्म सिंचाई, संरक्षित खेती, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, फसल विविधीकरण, जैविक एवं उन्नत तकनीकी खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है।" उनके अनुसार, जब एक किसान सफल होता है, तो वह अन्य दस किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

विभागीय अधिकारियों के निर्देश

भ्रमण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आत्मा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, "विभागीय समन्वय एवं सतत फील्ड मॉनिटरिंग से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है," जिसे भविष्य में और भी अधिक गति देने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यक्षमता की सराहना की।

कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक निरंजन सिंह राठौड़, संयुक्त निदेशक उद्यान महेश चंद्र चैजरा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी इस भ्रमण दल का हिस्सा थे। उन्होंने किसानों को तकनीक के साथ-साथ बाजार के रुझानों को समझने की सलाह भी दी। अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि किसानों की आय दोगुनी करना ही सरकार का अंतिम लक्ष्य है, जिसके लिए वे निरंतर फील्ड में रहकर तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

नवाचार और आत्मनिर्भरता

अंत में, प्रमुख शासन सचिव ने किसानों का आह्वान किया कि वे अपने सफल अनुभवों को साझा करें। नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि है। यह स्पष्ट है कि यदि राज्य भर में इसी तरह कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ, तो पारंपरिक खेती करने वाले किसान भी आधुनिक उद्यमी बनकर समाज में एक नई पहचान बना सकेंगे। यह बदलाव न केवल आय में वृद्धि करेगा, बल्कि युवाओं को भी कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित करेगा।

किसानों में नवाचार की यह भूख ही देश के कृषि विकास का आधार है। भीलवाड़ा में जो नवाचार देखे गए हैं, वे अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकते हैं। कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का यह संकल्प देश को नई मजबूती प्रदान करेगा। सरकार की इन कल्याणकारी नीतियों का लक्ष्य किसानों के जीवन स्तर में आमूलचूल परिवर्तन लाना है, ताकि वे आने वाली चुनौतियों का सामना पूरी हिम्मत और आधुनिक संसाधनों के साथ कर सकें।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी सरकारी विभाग द्वारा साझा की गई रिपोर्ट और स्थानीय किसानों के अनुभवों पर आधारित है। कृषि योजनाएं, अनुदान और तकनीकी नियम समय के साथ परिवर्तन के अधीन हैं। अतः कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पूर्व संबंधित कृषि या उद्यानिकी कार्यालय से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 25, 2026: 9:40 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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