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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 30 May 2026 · 11:05 AM

उदंती-सीतानदी में हनी बैजर की मौजूदगी: पारिस्थितिकी के लिए शुभ संकेत

उदंती-सीतानदी में हनी बैजर की मौजूदगी

(धमतरी, छत्तीसगढ़)। उदंती-सीतानदी में हनी बैजर की मौजूदगी ने न केवल वन अधिकारियों को बल्कि वन्यजीव प्रेमियों को भी बेहद उत्साहित कर दिया है। अखिल भारतीय बाघ जनगणना के दौरान वन्यजीव निगरानी अभ्यास के तहत वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में इस दुर्लभ 'छिंद भालू' (हनी बैजर) की तस्वीर कैद हुई है। इस क्षेत्र में इस जीव का दिखना एक स्वस्थ और विविध पारिस्थितिकी तंत्र का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, निगरानी प्रक्रिया के दौरान हनी बैजर के अलावा भालू के शावकों के वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि यह क्षेत्र न केवल बाघों के लिए, बल्कि ऐसे कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण जीवों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में उभरा है जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।[1]

हनी बैजर की विशेषताएं

हनी बैजर, जिसे स्थानीय भाषा में छिंद भालू के नाम से जाना जाता है, आकार में छोटा जरूर होता है, लेकिन अपनी साहस और आक्रामकता के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इनके बारे में जानकारी देते हुए वरुण जैन ने बताया कि यह जीव अत्यंत निडर होता है और अपनी रक्षा के लिए कभी-कभी तेंदुए और बाघ जैसे बड़े शिकारियों से भी भिड़ने से नहीं कतराता है।

हनी बैजर के व्यवहार और शारीरिक बनावट पर चर्चा करते हुए उप निदेशक ने कहा:

"ये छिंद भालू छोटे आकार के होते हैं, लेकिन अत्यंत क्रूर और साहसी माने जाते हैं। उनकी मोटी खाल, तेज पंजे और आक्रामक स्वभाव उन्हें अन्य जंगली जानवरों से अलग बनाता है।"

पारिस्थितिकी तंत्र का रक्षक

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ये जीव पर्यावरण में सांपों और अन्य छोटे मांसाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मुख्य रूप से निशाचर होते हैं और घने जंगलों, घास के मैदानों और दीमकों से भरपूर आवासों में रहना पसंद करते हैं। कैमरा ट्रैप में इनकी सक्रियता का दर्ज होना वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

वन विभाग के अनुसार, यह रिजर्व न केवल हनी बैजर का घर है, बल्कि यहां कई अन्य दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां भी निवास करती हैं। विभाग द्वारा इन जीवों की लगातार निगरानी और उनके आवासों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उदंती-सीतानदी में हनी बैजर की मौजूदगी इस बात की गवाही देती है कि यहां की सुरक्षा व्यवस्था सही दिशा में काम कर रही है।

संरक्षण के निरंतर प्रयास

विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इन दुर्लभ जीवों को अपने प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित वातावरण मिले। वरुण जैन ने कहा कि हनी बैजर के साथ-साथ अन्य दुर्लभ जीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग प्रतिबद्ध है। विभाग की टीमें लगातार इन जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखती हैं ताकि अवैध शिकार या अन्य मानवीय हस्तक्षेप से उन्हें बचाया जा सके।

अंततः, छत्तीसगढ़ के जंगलों में इन दुर्लभ प्रजातियों का पनपना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में और अधिक शोध और निगरानी से इन जीवों के व्यवहार को समझने में और मदद मिलेगी। उदंती-सीतानदी में हनी बैजर की मौजूदगी न केवल जैव विविधता को दर्शाती है, बल्कि वन विभाग के संरक्षण प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट वन विभाग द्वारा जारी जानकारी और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। वन्यजीवों के व्यवहार और क्षेत्र में उनकी उपस्थिति संबंधित शोध का विषय है। यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्य से प्रकाशित की गई है इसके आधार पर लिए जाने वाले किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी May 30, 2026: 11:05 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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