(दिल्ली)। भारत में बढ़ता मोटापा और डायबिटीज ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी किए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के आंकड़े बताते हैं कि देश में वयस्कों के बीच वजन और ब्लड शुगर का स्तर तेजी से ऊपर जा रहा है। सर्वे के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मोटापे की दर अधिक देखी गई है, जो हमारी बदलती जीवनशैली का संकेत है।[1]
वर्ष 2023-24 के दौरान आयोजित इस व्यापक सर्वे में पाया गया कि 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की लगभग 30.7 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत था। वहीं, पुरुषों में भी यह समस्या बढ़ी है, जहां मोटापा और अधिक वजन की दर 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गई है। यह बढ़ता रुझान गैर-संचारी रोगों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
मोटापे के अलावा, हाई ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना भी स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में उच्च या बहुत उच्च ब्लड शुगर लेवल होने की दर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों में भी यह आंकड़ा 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डायबिटीज और हृदय रोगों के बढ़ते खतरों की ओर इशारा करता है।
स्वास्थ्य सर्वे पर आधिकारिक निष्कर्ष में कहा गया है:
"ओबेसिटी और हाई ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों और स्ट्रोक जैसी गैर-संचारी बीमारियों के लिए बड़े जोखिम कारक हैं।"
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, मोटापे की समस्या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग है। महिलाओं में मोटापे की सबसे अधिक दर पुडुचेरी (46.3 प्रतिशत) और चंडीगढ़ (44 प्रतिशत) में दर्ज की गई है। इसके विपरीत, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मोटापा अपेक्षाकृत कम पाया गया है। पुरुषों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने सबसे अधिक मोटापे की दर दर्ज की है, जो चिंताजनक है।
इस सर्वे में 7.1 लाख से अधिक महिलाओं और एक लाख से अधिक पुरुषों को शामिल किया गया था, जिससे देश के स्वास्थ्य का सटीक चित्रण मिल सके। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि देश में स्वास्थ्य बीमा कवरेज का दायरा बढ़ा है। पारिवारिक स्तर पर स्वास्थ्य बीमा कवरेज 41.0 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है, जो सरकार की सफल योजनाओं को दर्शाता है।
भारत में बढ़ता मोटापा और डायबिटीज के बीच आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) जैसी प्रमुख योजनाओं ने आम लोगों तक सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इस विस्तार ने न केवल वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि कमजोर वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा तक पहुंच को और सुलभ बनाया है। यह प्रगति सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और समान स्वास्थ्य सेवाओं की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
निष्कर्ष यह है कि भले ही इलाज के साधन सुलभ हो रहे हैं, लेकिन अपनी जीवनशैली में सुधार करना अनिवार्य है। भारत में बढ़ता मोटापा और डायबिटीज से निपटने के लिए जागरूक होना और खान-पान में अनुशासन लाना समय की मांग है। स्वास्थ्य मंत्रालय की यह रिपोर्ट भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए आधार तैयार करेगी, जिससे देश को एक स्वस्थ भविष्य की ओर ले जाया जा सके।
यह रिपोर्ट नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के आंकड़ों पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी व्यक्तिगत परामर्श के लिए योग्य डॉक्टर से संपर्क करें। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस रिपोर्ट की सूचनाओं के आधार पर किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम या चिकित्सा परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
#HealthForAll
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) May 29, 2026
Union Health Ministry Releases National Family Health Survey – 6
NFHS-6 Reflects India’s Accelerated Progress in Maternal and Child Health, Nutrition and Financial Protection
Institutional Deliveries Reach 90.6%
ANC Coverage increases from 92.6% to 95.9%
Any… pic.twitter.com/9aSHU2RYua
Author:अजय त्यागी
May 30, 2026: 11:20 AM
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