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Latest News श्रृद्धांजलि Digital Newsletter 01 Jun 2026 · 12:03 PM

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन: खामोश हुई मखमली आवाज

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर

(मुंबई, महारष्ट्र)। पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय फिल्म संगीत के उस स्वर्णिम अध्याय की समाप्ति है, जो अपनी सादगी और शालीनता के लिए जाना जाता था। 31 मई 2026 को अंतिम सांस लेने वाली यह महान हस्ती केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी आवाज थीं, जिसने लता मंगेशकर के दौर में भी अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान कायम की थी। सांताक्रूज श्मशान घाट में दोपहर 2 बजे होने वाले उनके अंतिम संस्कार के साथ ही संगीत की एक कालजयी यात्रा का पटाक्षेप हो जाएगा। [1]

पद्म भूषण से सम्मानित सुमन जी का जाना यह याद दिलाता है कि कला की चमक कभी कम नहीं होती, भले ही कलाकार हमारे बीच न रहे। उनके करियर की शुरुआत 1954 में हुई और उन्होंने करीब चार दशकों तक अपनी गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा। वह दौर ऐसा था जब संगीत में शोर कम और धुनें अधिक थीं, और सुमन कल्याणपुर की मखमली आवाज इसी सुकून का पर्याय हुआ करती थी।

वर्तमान समय में भी उनकी आवाज में जो जादू, जो कशिश थी वो आपको उनकी लाइव परफोर्मेंस देखकर ही पता लग जाएगा (विडियो रिपोर्ट के अंत में साझा किया गया है)। 

संगीत का सफरनामा

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन उस आवाज की खामोशी है जिसने 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' और 'ना तुम हमें जानो' जैसे सदाबहार नग्मे दिए। उनका जन्म 1937 में हुआ था और बाद में वह मुंबई आ गईं। संगीत की तालीम और उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि उन्होंने बॉलीवुड के शीर्ष संगीतकारों के साथ काम किया। उनकी गायकी में वह बारीकियां थीं, जो किसी भी गीत में जान फूंक देती थीं। नूर महल फिल्म के लिए गाए उनके गीत "मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा" के बारे में तो कई लोग आज तक भ्रम में हैं कि यह गीत लता जी का गया हुआ है। सुमन कल्याणपुर की आवाज कई मायनो में लता जी से भी बेहतरीन थी लेकिन सफलता का ताज हर सर पर नहीं सजता। इसीलिए वो अपने दौर में लता जितनी प्रसिद्धि प्राप्त नहीं कर सकीं।  

आज के दौर में जब संगीत को केवल मशीनों और ऑटो-ट्यून के सहारे परोसा जा रहा है, तब सुमन जी जैसी गायिकाओं का जाना एक बड़ी रिक्तता पैदा करता है। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि मराठी, बंगाली और अन्य कई भारतीय भाषाओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन नई पीढ़ी के उन गायकों के लिए एक बड़ा सबक है, जो 'रातों-रात स्टार' बनने की दौड़ में सुरों की समझ को दरकिनार कर रहे हैं।

साधना और सफलता

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन उस गरिमा का अंत भी है जो साठ और सत्तर के दशक के गायकों में देखी जाती थी। उन्होंने अपनी गायकी में कभी भी विवादों या दिखावे का सहारा नहीं लिया। पद्म भूषण जैसे सम्मान से नवाजी गईं सुमन जी का जीवन हमेशा से ही अनुशासन और साधना का उदाहरण रहा है। उनके गाए गीतों की सूची देखें तो पता चलता है कि उन्होंने हर तरह के भावों को स्वर दिया, फिर चाहे वह विरह हो या प्रेम।

हालांकि, अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप वह मुकाम मिला, जिसकी वह हकदार थीं? यह सवाल हमेशा बना रहेगा, लेकिन एक पेशेवर संपादक के नजरिए से देखें तो यह व्यवस्था की वह विडंबना है जो अक्सर महान कलाकारों को उनकी जीवित अवस्था में वह दर्जा नहीं दे पाती, जिसके वे अधिकारी होते हैं। पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन परोक्ष रूप से इस बात का भी परिचायक है कि हमारे समाज में कला के वास्तविक कद्रदान अब इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गए हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 1, 2026: 12:03 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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