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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 02 Jun 2026 · 4:02 PM

स्कूल की छत गिरी: फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर खतरनाक मजाक

स्कूल की छत गिरी

तिरुवनंतपुरम, केरल। स्कूल की छत गिरी और केरल के एक सरकारी संस्थान में नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। तिरुवनंतपुरम के अट्टाकुलंगरा सरकारी स्कूल में सोमवार शाम करीब 5:30 बजे मुख्य कार्यालय की टाइलों वाली छत अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। गनीमत रही कि उस समय तक स्कूल परिसर से छात्र, शिक्षक और कर्मचारी जा चुके थे, अन्यथा यह घटना एक भीषण त्रासदी का रूप ले सकती थी।[1]

यह कमरा नियमित रूप से कार्यालय के कर्मचारियों और शिक्षकों द्वारा उपयोग किया जाता था। जैसे ही छत के गिरने की तेज आवाज हुई, स्थानीय निवासी दौड़कर मौके पर पहुंचे और सुनिश्चित किया कि कोई अंदर फंसा तो नहीं है। घटना के तुरंत बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से कंप्यूटर व महत्वपूर्ण फाइलों को सुरक्षित दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया।

लापरवाही का कड़वा सच

स्कूल की छत गिरी की इस घटना ने उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जो शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूल भवनों की फिटनेस और सुरक्षा को लेकर किए गए थे। शिक्षा मंत्री एन. शमशुद्दीन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उप निदेशक (शिक्षा) से तत्काल जांच रिपोर्ट तलब की है। सवाल यह है कि यदि इमारत जर्जर थी, तो क्या उसे 'फिट' घोषित करने की जहमत उठाई गई थी?

"भवन को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने में भारी लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण यह छत गिरी।" - एन. शमशुद्दीन, शिक्षा मंत्री।

प्रशासन का तर्क है कि यह एक विरासत (हेरिटेज) इमारत है, इसलिए इसके नवीनीकरण की अनुमति नहीं मिल सकी। लेकिन क्या हेरिटेज होने का मतलब यह है कि इसे जर्जर छोड़ दिया जाए कि वह किसी की जान ले ले? मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच की जाएगी कि क्या इस बार फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया गया था या बिना किसी अनुमति के वहां कार्यालय चलाया जा रहा था।

अधिकारियों की दोहरी चाल

स्कूल की छत गिरी के बाद अब 'हेरिटेज' का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकारी इमारतों की फिटनेस पर सवाल उठे हैं। यदि इमारत चलने लायक नहीं थी, तो वहां 'समग्र शिक्षा केरल' (SSK) का कार्यालय क्यों चलाया जा रहा था? यह प्रश्न उन अभिभावकों के मन में डर पैदा कर रहा है जिनके बच्चे इन सरकारी स्कूलों में अपना भविष्य तलाशने आते हैं।

"इस दुर्घटना ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि अभिभावकों के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दी है।" - स्थानीय रिपोर्ट।

यह घटना दिखाती है कि कैसे सिस्टम की फाइलें तो दुरुस्त रहती हैं, लेकिन धरातल पर कंक्रीट की ईंटें जवाब दे जाती हैं। क्या सरकार अब इस जांच के बाद उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई करेगी जिन्होंने फाइलों पर 'सब कुछ ठीक है' के दस्तखत किए थे? या फिर यह मामला भी किसी पुरानी फाइल की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

शिक्षा की गिरती नींव

स्कूल की छत गिरी की यह घटना केवल एक टाइल वाली छत का गिरना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था का गिरना है जो कागजों पर तो चमकती है, लेकिन हकीकत में ढह रही है। नए सत्र की शुरुआत में ही ऐसा हादसा अभिभावकों के भरोसे को तोड़ने के लिए काफी है। क्या हमारे स्कूलों की सुरक्षा अब केवल किस्मत भरोसे है?

यदि शासन और प्रशासन ने समय रहते इस 'हेरिटेज' बहानेबाजी के पीछे छुपी भ्रष्टाचार की परतों को नहीं खोला, तो आने वाले समय में केवल छत ही नहीं, बल्कि पूरा शिक्षा तंत्र ही खतरे की जद में होगा। अब गेंद शिक्षा विभाग के पाले में है कि वे केवल एक खानापूर्ति वाली रिपोर्ट सौंपते हैं या वास्तविक दोषियों को सजा दिलाते हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 2, 2026: 4:02 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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