छत्रपति संभाजी नगर, महाराष्ट्र। मनोज जारांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण आंदोलन को एक नए और निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। सरकार को सीधे चेतावनी देते हुए जारांगे ने उप-समिति की बैठक के आदेशों को तुरंत जारी करने की मांग की है। जारांगे पाटिल का कहना है कि अब सरकार के पास देरी करने का कोई विकल्प नहीं बचा है। वे 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स की खोज और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए हैं। मराठा समुदाय में इस बार गुस्सा चरम पर है और सरकार पर दबाव हर पल बढ़ता जा रहा है।
पिछले दिनों सरकार द्वारा जारी किए गए उस आदेश का जारांगे ने स्वागत किया, जिसमें शहीदों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई है। हालांकि, उन्होंने इस आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्द 'सहानुभूति' (compassion) पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि यह बलिदान है, न कि कोई दया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस शब्द को तत्काल हटाया जाए और शहीदों के परिवारों को बिना किसी शर्त के पूरा सम्मान दिया जाए। यह मांग मराठा आंदोलन की गंभीरता को एक बार फिर रेखांकित करती है।[1]
मनोज जारांगे पाटिल ने आज एक महत्वपूर्ण मांग दोहराई है, जो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को आज ही हैदराबाद गजट से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। यह दस्तावेज मराठा समुदाय को कुनबी (OBC) प्रमाण पत्र दिलाने में एक मजबूत कानूनी आधार बन सकता है। जारांगे की यह स्पष्ट चेतावनी है कि अगर सरकार ने आज इस पर निर्णय नहीं लिया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। आंदोलनकारी अब कागजी आश्वासनों से थक चुके हैं और उन्हें ठोस सरकारी कार्रवाई की दरकार है।
"सरकार ने जो कल आदेश दिए, हम उसका स्वागत करते हैं, लेकिन 'सहानुभूति' शब्द को हटाना होगा। शहीदों को हक मिलना चाहिए, भीख नहीं। हैदराबाद गजट के निर्देश आज ही जारी हों।" - मनोज जारांगे पाटिल, मराठा आंदोलनकारी।
आंदोलन के दौरान मनोज जारांगे पाटिल ने उन 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स का मुद्दा उठाया है, जिन्हें खोजकर कुनबी-मराठा जाति का प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का वादा किया गया था। उनका आरोप है कि सरकारी मशीनरी जानबूझकर देरी कर रही है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। जारांगे ने सरकार को साफ शब्दों में कह दिया है कि लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त विभागीय जांच होनी चाहिए।
मनोज जारांगे पाटिल की बढ़ती सक्रियता ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उप-समिति की बैठक के बाद अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में है। मराठा समुदाय का एक बड़ा वर्ग जारांगे के साथ खड़ा है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आंदोलन के इस 'शॉकिंग' मोड़ ने पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस कड़े अल्टीमेटम को मानकर समाधान निकालती है या फिर आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।
"अब सरकार के पास समय नहीं है। 58 लाख रिकॉर्ड्स की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना होगा। हमारी मांगें स्पष्ट हैं और हम अपने हक से पीछे हटने वाले नहीं हैं।" - आंदोलनकारी का रुख।
महाराष्ट्र सरकार के लिए फिलहाल यह एक 'डू और डाई' जैसी स्थिति है। एक ओर मराठा समुदाय की भावनाओं का ज्वार है, तो दूसरी ओर कानूनी पेचीदगियां। मनोज जारांगे पाटिल का यह रुख बताता है कि अब कोई भी ढिलाई सीधे तौर पर सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत का सबब बन सकती है। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, लेकिन जारांगे के तेवर बता रहे हैं कि लड़ाई अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।
मनोज जारांगे पाटिल ने जिस तरह से सरकार को बैकफुट पर धकेला है, वह किसी बड़े बदलाव का संकेत है। शहीदों के सम्मान से लेकर कुनबी प्रमाणपत्रों की फाइलों तक, हर कदम पर सरकार को जवाबदेह ठहराना जारांगे की रणनीति का हिस्सा है। मराठा आरक्षण का यह मुद्दा अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है। आने वाले कुछ घंटे महाराष्ट्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो तय करेंगे कि राज्य में शांति बनी रहेगी या आंदोलन का नया अध्याय शुरू होगा।
Chhatrapati Sambhaji Nagar, Maharashtra: Maratha movement activist Manoj Jarange Patil demanded that the government issue immediate orders regarding the sub-committee meeting. He expressed expectations for orders on 58 lakh Kunbi records and action against negligent officials.… pic.twitter.com/XPrkSvPsWr
— IANS (@ians_india) June 2, 2026
Author:अजय त्यागी
June 2, 2026: 8:16 PM
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