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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 03 Jun 2026 · 10:41 PM

अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं: इलाज की आस में सिसकती मानवता

ज्ञापन प्रस्तुत करते कार्यकर्ता

बीकानेर, राजस्थान। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं आज उस मोड़ पर आ गई हैं, जहां जीवन बचाने वाला संस्थान खुद ही एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि मंडल ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, तो वे केवल अपनी बात नहीं कह रहे थे, बल्कि उन हजारों मरीजों की व्यथा सुना रहे थे जो रोज यहाँ के लचर प्रबंधन की भेंट चढ़ जाते हैं। यह केवल सरकारी फाइलों में दर्ज एक शिकायत नहीं, बल्कि उस हर व्यक्ति का दर्द है जिसने अपने प्रियजनों को अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं के बीच दम तोड़ते या तड़पते देखा है।

संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र की बदहाली का आलम यह है कि जो बुनियादी संसाधन एक अस्पताल में होने चाहिए, वे यहाँ नदारद हैं। मरीजों को इलाज तो दूर, स्ट्रेचर तक के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं इस हद तक बढ़ चुकी हैं कि परिजनों को अपने बीमार अपनों को गोद में उठाकर जांच कक्ष तक ले जाना पड़ता है। क्या एक सभ्य समाज में स्वास्थ्य सुविधाओं का यही वह दुखद स्तर है, जिसे हम स्वीकार करने को मजबूर हैं?

संसाधनों का भीषण अभाव

अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरीजों को पट्टी, केनुला और सिरिंज जैसी छोटी-छोटी चीजें भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। जो चिकित्सा सुविधा पूरी तरह से सरकारी खर्चे पर होनी चाहिए, वहाँ गरीब मरीज अपनी जेब खाली करने को मजबूर हैं। एक तरफ आधुनिक इमारतें खड़ी की जा रही हैं, तो दूसरी तरफ उन इमारतों के भीतर का तंत्र पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं के चलते जांच के उपकरण धूल फांक रहे हैं और मरीजों का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।

जांच सैंपल लेने का समय दोपहर 12 बजे तक सीमित कर देना, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उन मरीजों के लिए अभिशाप बन गया है जो मीलों का सफर करके यहाँ पहुंचते हैं। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं के कारण ही उन्हें मजबूरी में निजी केंद्रों पर भारी खर्च करना पड़ रहा है। जो वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए निर्धारित हैं, उनकी अनुपस्थिति इस पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है। मरीजों की जांच रिपोर्ट का समय पर न मिलना और पूछताछ केंद्र की लचर स्थिति, इस दर्दनाक हकीकत को और गहरा कर देती है।

"अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं ने मरीजों की कमर तोड़ दी है। प्रशासनिक लापरवाही के कारण करोड़ों की मशीनें बेकार पड़ी हैं और लोग बाहर से जांच करवाने को मजबूर हैं," सलीम भाटी, राष्ट्रीय सचिव, अल्पसंख्यक विभाग।

प्रशासनिक उदासीनता की मार

अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं केवल मशीनों या दवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नई बनी इमारतों के जर्जर होने तक पहुंच गई है। गायनिक और मेडिसिन विभाग की नई बिल्डिंगें सालों से शिफ्टिंग का इंतज़ार कर रही हैं। करोड़ों के निर्माण के बाद भी उनका जनहित में उपयोग न होना एक गंभीर सवाल है। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं और सुपरविजन की कमी के कारण आज ट्रोमा सेंटर की छतें गिरने की खबरें आ रही हैं। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ भी है।

इसके अलावा, सुरक्षा और सफाई व्यवस्था में धांधली की खबरें रोज़मर्रा की बात हो गई हैं। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं के कारण न तो गाड़ियां सुरक्षित हैं और न ही परिसर में सफाई का स्तर संतोषजनक है। रेजिडेंट डॉक्टर्स और परिजनों के बीच होने वाले विवाद, अस्पताल की कार्यसंस्कृति पर एक काला धब्बा हैं। यदि मेडिकल रिलीफ सोसायटी ने समय रहते संवाद स्थापित नहीं किया, तो भविष्य में यह विवाद और भी विकराल रूप धारण कर सकते हैं।

घोटालों की काली परत

अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं के पीछे छिपे भ्रष्टाचार के किस्से तो और भी चौंकाने वाले हैं। जांच कंपनी द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों का क्लेम उठाना, इस बात का प्रमाण है कि सिस्टम के भीतर कुछ लोग मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं को मिटाने के बजाय, डिपेनल की गई कंपनियों को दोबारा बड़े काम सौंपना गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यह एक ऐसा संगठित भ्रष्टाचार है जो सरकारी खजाने के साथ-साथ आम आदमी के विश्वास को भी लूट रहा है।

अस्पताल में फैली अव्यवस्थाएं को सुधारने के लिए अब केवल कागजी आदेशों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए एक उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है। बीकानेर के इस अस्पताल की हालत को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि यदि तत्काल सुधार नहीं किए गए, तो यह संस्थान अपनी साख पूरी तरह खो देगा। वक्त आ गया है कि सरकार अपनी संवेदनशीलता दिखाए और मरीजों को वह स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराए, जिसका वे हकीकत में हक रखते हैं।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट प्राप्त तथ्यों और ज्ञापन में दर्ज शिकायतों पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या कानूनी दावों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को संबंधित सरकारी नियमों की जांच स्वयं करने की सलाह दी जाती है।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 3, 2026: 10:41 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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