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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 05 Jun 2026 · 5:39 PM

सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े: सरोज बिश्नोई बर्खास्त

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

अजमेर, राजस्थान। राजस्थान में सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े और नकल के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान लोक सेवा आयोग ने कनिष्ठ सहायक/लिपिक ग्रेड-II संयुक्त सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में नकल के जरिए चयनित हुई और वर्तमान में निलंबित चल रही लिपिक ग्रेड-प्रथम सरोज बिश्नोई को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिश्नोई लगभग 6 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर चुकी थी। सरोज बिश्नोई को परीक्षा पास करने के लिए अनुचित साधनों के प्रयोग करने के कृत्य को राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन मानते हुए उसे सेवा से बर्खास्त किया गया है।[1]

सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े की यह घटना प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है। आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि आयोग की ओर से राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 को इस कार्रवाई का आधार बनाया गया है। आदेश के अनुसार सरोज बिश्नोई ने सरकारी कर्मचारी के रूप में सत्यनिष्ठा का अभाव और अनैतिक रूप से जीवन जीना पाया है, जो सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस प्रकार की घटनाएं दर्शाती हैं कि राज्य सरकार नकल माफियाओं के खिलाफ कितनी गंभीर है।

सत्यनिष्ठा और नियमों का उल्लंघन

रिपोर्ट के अनुसार, मेहता ने बताया कि नियम 3 की अवहेलना के अंतर्गत प्रत्येक शासकीय सेवक को हर समय उच्च स्तर की सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता बनाए रखनी होती है। सरोज बिश्नोई का कृत्य सर्वथा अशोभनीय पाया गया है। उन्होंने बताया कि जांच में प्रमाणित हुआ है कि सरोज बिश्नोई ने परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए ब्लूटूथ डिवाइस जैसे अनुचित साधनों का सहारा लिया और इसके एवज में मुख्य आरोपी पौरव कालेर को अपने हस्ताक्षरशुदा चेक भी सौंपे, जो गंभीर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

आयोग की तत्परता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े के मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरोज बिश्नोई का चयन कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित वर्ष 2018 की लिपिक भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग की मेरिट सूची में 17वें स्थान पर हुआ था। इसके बाद उसने मार्च 2020 में आरपीएससी कार्यालय में कार्यग्रहण किया था, लेकिन गोपनीय सूत्रों से प्राप्त प्रामाणिक सूचना ने उसके पूरे करियर पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया।

साजिश और जांच का खुलासा

आयोग की सूचना पर जब एसओजी ने प्राथमिकी दर्ज कर सघन जांच शुरू की, तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, एसओजी की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पौरव कालेर नामक मुख्य आरोपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसे लीक पेपर हल करवाया था। परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ के माध्यम से सरोज बिश्नोई तक उत्तर पहुंचाए गए थे, जिसने उसकी पूरी सफलता को संदिग्ध बना दिया। सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े के इस खेल ने आयोग की साख को भी चुनौती दी थी।

जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपित कर्मचारी सरोज बिश्नोई ने बीमारी होने और अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देकर व्यक्तिगत सुनवाई से बचने के कई बहाने बनाकर कार्यवाही को टालने का प्रयास भी किया था। उन्होंने यह विधिक दलील भी दी कि जब तक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक विभागीय जांच को रोका जाए। हालांकि, आयोग ने उच्च न्यायालयों के स्थापित न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए इस आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया।

अदालत से भी नहीं मिली कोई राहत

विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया:

"प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमा दोनों समानांतर रूप से चलाए जा सकते हैं।"

इस रुख के कारण विभागीय जांच में कोई रुकावट नहीं आई। विभागीय जांच की कार्यवाही पर रोक लगवाने के उद्देश्य से सरोज बिश्नोई ने राजस्थान उच्च न्यायालय (जयपुर पीठ) में रिट याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके सभी तर्कों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि आपराधिक मामला और विभागीय जांच दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अदालत के कड़े रुख के बाद आयोग ने जांच पूरी की।

अंतिम परिणाम और बर्खास्तगी

अदालत के कड़े रुख के बाद आखिरकार 1 जून 2026 को आरपीएससी ने सरोज बिश्नोई को सरकारी नौकरी से बर्खास्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े के खिलाफ यह कार्रवाई उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक सबक है जो गलत रास्तों से सफलता पाना चाहते हैं। आयोग की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्ट तरीके से नौकरी हासिल करने वालों का भविष्य अंततः अंधेरे में ही होता है।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता कितनी आवश्यक है। आरपीएससी और एसओजी के तालमेल ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में जांच हो, तो बड़े से बड़े नकल माफियाओं को बेनकाब किया जा सकता है। सरोज बिश्नोई की बर्खास्तगी यह सुनिश्चित करती है कि मेहनत करने वाले युवाओं का हक कोई भी भ्रष्ट अधिकारी नहीं छीन सकेगा।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 5, 2026: 5:39 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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