भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वेदांता समूह की कंपनी और भारत में जिंक, लेड और सिल्वर के सबसे बड़े एवं एकमात्र एकीकृत उत्पादक, हिंदुस्तान जिंक ने अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए एक वृहद् आयोजन किया। कंपनी ने सघन वृक्षारोपण एवं पर्यावरण प्रबंधन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए रामपुरा आगूचा माइंस परिसर में एक विशेष अभियान चलाया। यह आयोजन न केवल प्रकृति के प्रति संस्थान के प्रेम को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उनके सक्रिय प्रयासों का भी प्रमाण है।
इस वृक्षारोपण अभियान में कंपनी के समर्पित कर्मचारियों और उनके बिजनेस पार्टनर्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर एक हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया और परिसर में बड़ी संख्या में पौधे रोपे। यह प्रयास स्पष्ट करता है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन भी संस्थान की प्राथमिकता है। हिंदुस्तान जिंक द्वारा संचालित यह पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान क्षेत्र में हरियाली और पारिस्थितिक संतुलन को और अधिक मजबूती प्रदान करने में सहायक होगा।
कंपनी की सीएसआर (CSR) टीम के सहयोग से वृक्षारोपण का दायरा माइंस परिसर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके आसपास के स्थानीय समुदायों में भी अभियान चलाए गए। इन क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए, ताकि आम नागरिक भी प्रकृति के महत्व को समझ सकें। समुदाय के साथ मिलकर किया गया यह कार्य समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सामूहिक चेतना जागृत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
इसके अलावा, कंपनी की आवासीय कॉलोनी और माइन परिसर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए नागरिकों को कपड़े के बैग वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य प्लास्टिक के उपयोग को कम करना है ताकि एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की नींव रखी जा सके, जो सभी के लिए सुरक्षित हो।
हिंदुस्तान जिंक के अधिकारियों ने बताया कि सतत विकास (Sustainable Development) संस्थान की कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। वृक्षारोपण के साथ-साथ कंपनी पर्यावरण प्रबंधन के उन मानकों का पालन कर रही है, जो भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित यह अभियान न केवल आज के दिन की औपचारिकता है, बल्कि यह कंपनी की दीर्घकालिक पर्यावरण नीति का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे निरंतरता के साथ लागू किया जा रहा है।
संस्थान का मानना है कि यदि औद्योगिक इकाइयां समय रहते सचेत हो जाएं और प्रकृति की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं, तो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हिंदुस्तान जिंक का यह वृक्षारोपण अभियान इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। कंपनी आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल स्वयं को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाए रखेगी, बल्कि अपने कार्यक्षेत्र के आसपास के वातावरण को भी शुद्ध और सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय निवासियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण बचाना केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों के समझदारी भरे उपयोग से भी जुड़ा है। हिंदुस्तान जिंक ने अपने इन जागरूकता सत्रों के माध्यम से एक पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का पुरजोर आह्वान किया है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति ऐसी सक्रियता न केवल कंपनी के लिए, बल्कि पूरे भीलवाड़ा जिले के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गई है, जिससे अन्य संस्थाएं भी प्रेरणा ले सकती हैं।
निष्कर्षतः, हिंदुस्तान जिंक द्वारा आयोजित यह विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम एक अत्यंत सफल और प्रेरणादायी आयोजन रहा। वृक्षारोपण, जागरूकता सत्र और प्लास्टिक मुक्त सामग्री के वितरण जैसे कार्यों ने यह सिद्ध किया कि औद्योगिक उन्नति और प्राकृतिक सुरक्षा साथ-साथ चल सकते हैं। संस्थान की यह प्रतिबद्धता सुनिश्चित करती है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा और स्वस्थ पर्यावरण बना रहे। अंततः, यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की निष्ठा का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन है।
Author:अजय त्यागी
June 5, 2026: 10:29 PM
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