शिवगंगा, तमिलनाडु। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित कीझाड़ी पुरातात्विक स्थल पर चल रही ग्यारहवें चरण की खुदाई के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। इस ऐतिहासिक स्थान पर प्राचीन तमिलों की लौह उत्पादन क्षमताओं की गवाही देने वाली एक प्राचीन भट्टी खोजी गई है। यह खोज वैश्विक स्तर पर प्राचीन तमिलों की उन्नत तकनीक और प्राचीन शहरी सभ्यता की समृद्धि और उनकी अभूतपूर्व प्रगति को एक बार फिर से मजबूती से प्रमाणित करती है।[1]
इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल पर ग्यारहवें चरण का खुदाई कार्य पिछले अठारह मार्च से बेहद तेजी और मुस्तैदी के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्तमान समय में पुरातत्व विभाग द्वारा लगभग डेढ़ एकड़ के विस्तृत दायरे में फैले नौ अलग-अलग ट्रेंच यानी खुदाई खाइयों में बहुत ही बारीक और गहन अध्ययन किया जा रहा है। पूर्व में हुई खुदाई से भी यहाँ कई लौह कलाकृतियाँ मिली थीं।
इससे पहले के चरणों में मिले विभिन्न अवशेष यहाँ पर एक प्राचीन कारखाने या बड़े लौह उत्पादन केंद्र की उपस्थिति की ओर साफ इशारा करते हैं। इसके बाद अब इस भट्टी की प्राप्ति ने देश भर के पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के बीच भारी उत्साह और जिज्ञासा पैदा कर दी है। आमतौर पर इन भट्टियों का उपयोग कच्चे लोहे को पिघलाकर उसे उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए किया जाता था।
शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों का दृढ़ विश्वास है कि इस भट्टी का उपयोग संगम काल के दौरान विभिन्न प्रकार के लोहे के औजारों को बनाने के लिए किया जाता होगा। इन वस्तुओं में मुख्य रूप से चाकू, दरांती और विभिन्न प्रकार के कृषि उपकरण शामिल हो सकते हैं। प्राचीन तमिलों की उन्नत तकनीक की इस ऐतिहासिक खोज से यह स्पष्ट रूप से सिद्ध होता है कि यह स्थान केवल एक रिहायशी इलाका नहीं था।
प्राचीन काल में यह क्षेत्र संभवतः एक बहुत बड़ा और समृद्ध औद्योगिक केंद्र था जहाँ विनिर्माण गतिविधियाँ बड़े पैमाने पर फल-फूल रही थीं। जब इस नई मिली भट्टी की समीक्षा पहले खोजी गई लौह कलाकृतियों के साथ की जाती है, तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ धातुकर्म उद्योग बहुत ही परिष्कृत और आधुनिक स्तर पर कार्य कर रहा था।
संगम युग के लोगों की जीवनशैली और उनके वैज्ञानिक कौशल को समझने के लिए यह खोज एक मील का पत्थर है। पुरातात्विक विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि इस चरण की निरंतर जारी खुदाई से प्राचीन तमिलों की उन्नत तकनीक, उनके अद्वितीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, औद्योगिक विकास और उनकी उत्कृष्ट शहरी सभ्यता के बारे में कई और चौंकाने वाले ऐतिहासिक साक्ष्य आने वाले समय में दुनिया के सामने आ सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण तमिलनाडु के कीझाड़ी में जारी पुरातात्विक खुदाई और वहां मिले ऐतिहासिक अवशेषों के घटनाक्रम पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।
Author:अजय त्यागी
June 13, 2026: 1:26 PM
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