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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 13 Jun 2026 · 7:39 PM

बड़ा फैसला, खनन की एनओसी पर जनसुनवाई टली

ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा

नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। राजस्थान के डाबला गांव की पहाड़ियों पर माइनिंग गतिविधियों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रशासनिक कवायद का स्थानीय स्तर पर जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया है। पर्यावरण विभाग द्वारा नियमों के तहत आज बारह जून दो हजार छब्बीस को ग्राम पंचायत परिसर में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में माइनिंग की संभावनाओं और पर्यावरण मंजूरी को लेकर स्थानीय लोगों के विचार जानना था।

इस प्रशासनिक बैठक की भनक लगते ही पूरे क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट हो गए। अधिकारियों के कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने से पहले ही पंचायत भवन के बाहर हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों का भारी हुजूम जमा हो गया। ग्रामीणों के इस अप्रत्याशित और तगड़े विरोध के सामने आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा और फिलहाल खनन की एनओसी पर जनसुनवाई को स्थगित करना पड़ा।

ग्रामीणों का भारी आक्रोश

इस विशेष प्रशासनिक बैठक में क्षेत्र के अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ मल और पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। अधिकारियों के आने से पहले ही माहौल पूरी तरह गरमा गया था। बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं, पशुपालक और क्षेत्र के गणमान्य लोग हाथों में खनन की एनओसी पर जनसुनवाई के विरोध की तख्तियां लेकर पंचायत भवन पहुँच गए। इस दौरान पूरे परिसर में भारत माता जिंदाबाद और खनन माफिया वापस जाओ के गगनभेदी नारे गूंज उठे।

इस बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम पंचायत डाबला के सरपंच सागरमल यादव और वीर चक्र विजेता भाई जयराम सिंह डाबला सहित कई प्रमुख लोग कर रहे थे। क्षेत्र के पशुपालक अपने मवेशियों के साथ आयोजन स्थल पर पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी आजीविका का संकट रखा। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि अगर पहाड़ियों को नष्ट किया गया तो उनके मवेशी बेघर हो जाएंगे और उनका पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा।

कानूनी प्रावधानों का हवाला

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रशासनिक अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के पुराने ऐतिहासिक आदेशों का स्पष्ट हवाला दिया गया। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि नियमानुसार सौ मीटर से अधिक ऊँची किसी भी पहाड़ी को अरावली पर्वत श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा माना जाता है और ऐसी जगहों पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक माइनिंग गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त आदेशों की प्रतियां भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कीं। इन दस्तावेजों के आधार पर ग्रामीणों ने तर्क दिया कि एनजीटी के नियमों के अनुसार माइनिंग क्षेत्र से मुख्य लिंक रोड तक पक्की सड़क का होना अनिवार्य है। इसके विपरीत डाबला की इन पहाड़ियों तक जाने के लिए वर्तमान में कोई वैधानिक या राजस्व विभाग का आधिकारिक रास्ता तक उपलब्ध नहीं है।

प्रशासनिक अधिकारियों का आश्वासन

स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों के इस चौतरफा तगड़े कानूनी विरोध को देखते हुए मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमले को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ मल ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों पर अपनी सहमति जताई। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जनता की भावनाओं और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ कोई भी नया काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

तनावपूर्ण माहौल के बीच अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ मल ने मौके पर ही ग्रामीणों के समक्ष आधिकारिक रूप से अपनी बात रखते हुए कहा है:

"प्रशासन पूरी तरह से नियमों और जनता के हितों के साथ खड़ा है। डाबला की इन पहाड़ियों की वास्तविक ऊंचाई का पहले पूरी तरह से वैज्ञानिक मैपिंग और सर्वे करवाया जाएगा। इस तकनीकी जांच की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही पर्यावरण विभाग आगे की कार्रवाई पर कोई अंतिम फैसला लेगा। हमारी प्राथमिकता है कि ग्रामीण जो चाहेंगे वही प्रशासनिक स्तर पर तय होगा।"

एकता की बड़ी जीत

अतिरिक्त जिला कलेक्टर के इस लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद खनन की एनओसी पर जनसुनवाई टाल दी गई जिससे ग्रामीण शांत हुए। प्रशासन के इस रुख के बाद डाबला की हरी-भरी पहाड़ियों पर मंडरा रहा माइनिंग का तात्कालिक खतरा पूरी तरह टल गया है। इस जनसुनवाई के स्थगित होने की घोषणा के बाद पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक ग्रामीण एकता की एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत बताया है।

सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और स्थानीय प्रशासन अभी भी पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में दोबारा बिना वैज्ञानिक जांच के इस तरह की कोई गुप्त कोशिश की गई, तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस प्रकार ग्रामीणों की सूझबूझ और एकजुटता के कारण आज खनन की एनओसी पर जनसुनवाई की प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली ताकतों को मुंह की खानी पड़ी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण डाबला ग्राम पंचायत में पर्यावरण विभाग द्वारा बुलाई गई बैठक और स्थानीय ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के घटनाक्रम पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV India Author:अजय त्यागी June 13, 2026: 7:39 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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